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अमर उजाला की खबर पर 3 पार्किंग ठेकेदारों के चालान

Tue, 15 Jul 2014 12:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर में पेड पार्किंग के नाम पर खुलेआम हो रही ओवरचार्जिंग पर आखिरकार नगर निगम अफसरों की नींद खुल गई। सोमवार को निगम अधिकारियों ने शहर की अलग-अलग पार्किंगों में जाकर सरप्राइज चेकिंग की और नियमों की पालना न करने के चलते कांट्रैक्टर्स पर जुर्माना भी लगाया। अमर उजाला की खबर के बाद ही अफसरों ने पेड पार्किंग की सुध ली।
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सोमवार को मेयर हरफूलचंद्र कल्याण ने पार्षद प्रदीप छाबड़ा, मलकीत सिंह और ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. सरिता मलिक के साथ मिलकर सुखना लेक, एलांते मॉल और इंपायर स्टोर सेक्टर-17 की पार्किंग में सरप्राइज चेकिंग की। तीनों पार्किंग में ओवरचार्जिंग के अलावा तमाम तरह की गड़बड़ियां भी सामने आई हैं।

सुखना लेक की पार्किंग में न तो इलेक्ट्रिसिटी टिकटिंग मशीन थी और न ही ठेकेदार के कारिंदे वर्दियों में नजर आए। वहीं, एलांते की पार्किंग में भी यही हाल था। यहां लोगों से ओवरचार्जिंग पर भी खूब हो रही थी। तीनों पार्किंग ठेकेदारों पर साढ़े 11 हजार का जुर्माना ठोका गया।
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इनमें एलांते मॉल की पार्किंग के ठेकेदार का सबसे ज्यादा 7500 रुपये का चालान हुआ, जबकि सुखना लेक पार्किंग के कांट्रैक्ट पर 2500 और इंपायर स्टोर पार्किंग कांट्रैक्ट का 1500 का चालान किया गया।

मेयर की कार्रवाई से सतीश कैंथ नाराज
एलांते माल के सामने की पेड पार्किंग में मेयर द्वारा की गई छापामार कार्रवाई से वार्ड पार्षद सतीश कैंथ नाराज हो गए हैं। मेयर के साथ छापामार कार्रवाई के दौरान नगर निगम के दो अन्य पार्षद प्रदीप छाबड़ा और मलकीयत सिंह भी मौजूद थे।

सतीश कैंथ का कहना है कि एलांते माल की पार्किंग उनके वार्ड के अंतर्गत आता है, ऐसे में मेयर द्वारा जब यहां पर आकर पार्किंग की चेकिंग की गई तो उन्हें किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई। जबकि, पिछले साल सदन में यह निर्णय लिया गया था कि मेयर जब भी किसी वार्ड में विकास कार्यों और समस्याओं को सुनने के लिए जाएंगे तो वहां के स्थानीय पार्षद को इसकी जानकारी दी जाएगी।

कैंथ का कहना है कि वह मेयर की शिकायत कांग्रेस अध्यक्ष बीबी बहल और शहर के सांसद पवन बंसल से भी करेंगे। सतीश कैंथ और मेयर हरफूलचंद्र कल्याण दोनों ही कांग्रेसी पार्षद हैं। कैंथ का कहना है कि मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है तो मेयर को यह समझना चाहिए कि एक साल बाद कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह भी अन्यों की तरफ पार्षद ही रहेंगे।

मालूम हो कि पिछले साल भी बिना जानकारी दिए हुए वार्ड में जाने के मामले को लेकर कांग्रेस पार्षद मुकेश बस्सी ने तत्कालीन मेयर सुभाष चावला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इस कारण कांग्रेस पार्षदों में जमकर गुटबाजी पैदा हो गई थी।
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