पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू का जिला मोहाली कोरोना महामारी से निपटने में पूरी तरह सक्षम नहीं है। जिला प्रशासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं में कई स्तर पर खामियां है। अगर आने वाले समय में स्थिति बिगड़ती है तो लोग मुश्किल में आ सकते हैं। कुछ दिन पहले कोरोना की स्थिति का आंकलन करने पहुंची केंद्र की टीम ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने मोहाली के गंभीर मरीजों को चंडीगढ़ में बढ़िया इलाज मिलने का मामला पीएम के समक्ष उठाया है। वहां से अभी तक जवाब का इंतजार है।
केंद्र की टीम पांच दिन में थी। इतना ही नहीं कुराली समेत कई अस्पतालों में टीम के साथ स्वास्थ्य मंत्री खुद मौजूद थे। टीम की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वेंटिलेटर की आवश्यकता वाले गंभीर रोगियों के लिए कोई सरकारी सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
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सभी गंभीर रोगियों को पटियाला भेजा जा रहा है। जबकि निजी अस्पताल में वेंटिलेंटर की सुविधा है लेकिन वहां पर जगह तक नहीं मिल पा रही है। टीम का यहां तक कहना है कि महामारी से निपटने के लिए कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं, वह भी सिर्फ कागजों में ही है। असल स्थिति काफी अलग है। वहीं, मुलाजिमों की कमी के चलते कोरोना को रोकने संबंधी कांट्रेक्ट ट्रेसिंग प्रोग्राम में भी कमी आ रही है। इतना ही नहीं टीम ने कोविड के मरीजों के इलाज को लेकर मोहाली जिला प्रशासन व चंडीगढ़ प्रशासन में उचित तालमेल स्थापित किया।
प्रशासन का दावा- इंतजाम पूरा
इस मामले में मोहाली के डीसी गिरीश दियालन का कहना है कि रिपोर्ट में जिन मुद्दों को उठाया गया था, उनका जवाब दिया गया है। जहां तक गंभीर मरीजों की सुविधा का संबंध है। मोहाली सिविल अस्पताल अभी तक निर्माणाधीन है। वहीं, ऐसे केसों को जिला प्रशासन की तरफ से पटियाला भेजा जाता है। इस संबंधी सारा काम एक योजना के तहत किया जाता है। इसके अलावा जिले के सारे प्राइवेट अस्पताल को निर्देश दिए गए हैं कि कोविड की देखभाल के लिए बिस्तरों की क्षमता बढ़ाई जाए। साथ ही इलेक्टिव सर्जरी को रोकने के आदेश दिए गए हैं। यहां तक गंभीर मरीजों के इलाज को लेकर पूरी सावधानी बरती जा रही रही।
ऐसे बढ़ा कोविड मरीजों का आंकड़ा
करीब एक महीने में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ा है। करीब 33 दिनों में साढ़े बारह हजार नए केस आए हैं। वहीं, सौ से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। कोरोना से मौत मामले में मोहाली ट्राइसिटी में पहले स्थान पर है।
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