चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय को केंद्र सरकार अधिक बजट नहीं देगी। निर्धारित बजट ही पीयू को मिलेगा। बताया जाता है कि केंद्र के पास पैसे का अभाव है। सरकार का इस समय पूरा ध्यान कोरोना नियंत्रण पर है। इस पर पैसे लगाए जा रहे हैं।
पीयू को हर साल वेतन के लिए 250 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिलते हैं। इस बजट में हर साल छह फीसदी की बढ़ोतरी होती है। दो साल से कोरोना चल रहा है। ऐसे में पीयू की आमदनी घट गई और पैसे का संकट खड़ा हो गया। पीयू अपने भवन निर्माण आदि के काम जारी रखना चाहती है। साथ ही अन्य योजनाओं पर भी रकम खर्च करना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि इसके लिए पीयू ने केंद्र से अतिरिक्त बजट की मांग की थी, लेकिन वहां से संदेश मिला है कि जो बजट तय है, वही मिलेगा।
उधर, रूसा के तहत पीयू को 50 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन अब तक पांच करोड़ रुपये ही मिले हैं। इस कारण पीयू के शोध प्रस्ताव शुरू नहीं हो पा रहे हैं। पीयू के पास ऐसे रिसर्च प्रस्ताव हैं जो समाज को लाभ देंगे। साथ ही नई तकनीक आने से लोगों का काम आसान होगा, लेकिन यह तभी होगा, जब पैसे मिलेंगे।