हरियाणा सरकार का बिजली कंपिनयों को घाटे से बाहर लाने का मॉडल केंद्र सरकार को भा गया है। कंपनियों को लाइन लॉस कम कर लाभ की स्थिति में लाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल की पीठ थपथपाई है। उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय विद्युत विभाग के सचिव को हरियाणा के इस दिशा में किए गए सराहनीय कार्यों का अध्ययन करने के लिए कहेंगी।
निर्मला सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री से बात कर रही थीं। उच्च स्तरीय बैठक में निवेश के लिए सक्रिय सुविधाओं में वृद्धि के अतिरिक्त ऊर्जावान विकास, सुधार, निवेश वृद्धि व एक सुधार केंद्रित कारोबारी माहौल बनाने पर चर्चा हुई। मनोहर लाल ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि संरचनात्मक सुधार के अंतर्गत उदय योजना के तहत सरकार डिस्कॉम के सकल वितरण एवं वाणिज्यिक घाटे को कम करने के लिए ठोस प्रयास कर रही है।
सकल वितरण एवं वाणिज्यिक घाटा 2015-16 के 30.02 प्रतिशत से घटकर 2020-21 में 16.22 प्रतिशत रह गया। इसके अलावा 2017-18 के दौरान, डिस्कॉम ने लक्ष्य वर्ष से दो साल पहले ही वित्तीय बदलाव हासिल कर 412 करोड़ रुपये का परिचालन, शुद्ध लाभ अर्जित किया है। वर्ष 2018-19 में यह लाभ 291 करोड़ रुपये और वर्ष 2019-20 में 331 करोड़ रुपये रहा।
डिस्कॉम ने अगले 3 वर्षों में 10 लाख स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए एनर्जी एफिशिएंट सर्विस लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। दिसंबर 2020 तक 2.15 लाख स्मार्ट मीटर लगाए गए। स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट में प्रीपेड सुविधा, ट्रस्ट रीडिंग - बेस्ड बिलिंग, बिजली बिल ऑनलाइन देखने के लिए मिस्ड कॉल सुविधा, डाकघरों के माध्यम से बिजली बिल भरना, नए कनेक्शन के लिए उपभोक्ता संतुष्टि दर और डिलीवरी का औसत समय जैसी सेवाएं शुरू की हैं।
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कोविड के बाद प्रदेश की अर्थव्यवस्था के पुन: उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। ‘वी आकार’ की रिकवरी प्राप्त करने और अर्थव्यवस्था के पुन: उत्थान का मार्ग प्रशस्त करने के लिए चार स्तंभों पर आधारित रणनीति बनाई है। सरकार का उद्देश्य 5 लाख रोजगार सृजित करना, एक लाख करोड़ रुपये का निवेश लाना व कई राज्य कानूनों (अधिनियमों, नियमों और दिशा - निर्देशों) को संशोधित करना है ।
सीएम ने यह दिया सुझाव
मनोहर लाल ने सुझाव देते हुए कहा कि शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए एनसीआरपीबी के शहरी बुनियादी ढांचा विकास कोष (यूआईडीएफ) को स्थापित किया जाए। इसके तहत राज्यों को एनसीआर में मुख्य बुनियादी ढांचा विकसित करने में सक्षम बनाने के लिए नाबार्ड की तर्ज पर कम ब्याज दर पर धन उपलब्ध कराया जा सकता है।