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सेलवेल घोटाला:क्रास एग्जामिनेशन अपने बयानों पर कायम रहा गवाह गुरप्रीत सिंह

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चंडीगढ़। सेलवेल घोटाले के मामले में सोमवार को गवाह गुरप्रीत सिंह से जिरह पूरी हो गई। इस दौरान गवाह गुरप्रीत सिंह अपने बयानों पर टिके रहे। सीबीआई ने इस मामले में 25 गवाह बनाए हैं।
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गवाह गुरप्रीत सिंह नगर निगम के सेवानिवृत्त एई हैं। अपनी गवाही में गवाह सिंह ने बताया कि जिस समय यह मामला हुआ वह बतौर जेई सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर आरसी दिवान के साथ काम कर रहे थे। बताया कि घोटाले में सेलवेल और आउटडोर कम्यूनिकेशन दोनों की मिलीभगत थी और इस मामले की पूरी जानकारी आरसी दीवान को थी। अब मामले की अगली सुनवाई पांच अप्रैल को होगी।
मामला वर्ष 2006 से 2014 के बीच शहर में 86 सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव और देखरेख से जुड़ा हैै। सेलवेल कंपनी को 10 सितंबर 2007 को नगर निगम ने दो आर्डर दिए थे। इसमें शहर के बाजारों में नवनिर्मित शौचालय, मार्ग की देखभाल और रखरखाव को सुनिश्चित करना था। हालांकि बाद में टेंडर नोटिस में एक नई शर्त लगा दी गई थी। इस बारे में जानकारी समाचार पत्रों के माध्यम से 13 जुलाई 2007 को प्रकाशित करवाई गई थी। कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम के अफसरों नेे टेंडर की शर्तें बदल दी थीं। इसके बाद पूर्व अधीक्षण अभियंता आरसी दिवान, सेलवेल कंपनी के निदेशक जिम्मी सुबावाला, महाप्रबंधक विश्वजीत दत्ता और आउटडोर कम्यूनिकेशन कंपनी के निदेशक मयसा गणेश के खिलाफ रिश्वत का केस दर्ज किया गया था। सीबीआई के मुताबिक, इस घोटाले में सरकारी राजकोष को 13.66 करोड़ का नुकसान हुआ था। इसमें यूटी सचिवालय के कर्मचारी अशोक का नाम भी आया था।
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