रुपिंदरजीत कौर ने अपने पद और रूतबे का दुरूपयोग करते हुए पंचायत का प्रस्ताव पास होने के दो दिन पहले ही छह से अधिक किसान परिवारों की 170 कनाल निजी मालिकाना जमीन को पंचायत की जमीन घोषित कर दिया। रुपिंदरजीत कौर ने साजिश के तहत पिछले वर्ष 30 दिसंबर को जिला माल अफसर को पत्र लिखकर पक्खोवाल की कोटक महिंद्रा बैंक का खाता दर्ज करते हुए उक्त जमीन का मुआवजा हड़पने की कोशिश की।
थाना सुधार के प्रभारी अमृतपाल सिंह की रिपोर्ट के अनुसार गांव की सरपंच सतवंत कौर, पंच प्रेमजीत कौर, इंदरजीत कौर, जगदेव सिंह, हरविंदर सिंह और पटवारी दलजीत सिंह भी साजिश में शामिल मिले और जांच में कोई सहयोग नहीं किया। कई बार तलब करने के बावजूद आरोपी जांच में शामिल नहीं हुए।
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नवदीप कौर द्वारा जिला ग्रामीण पुलिस को एक नवंबर को लिखे पत्र ने इस सनसनीखेज घोटाले की साजिश का पर्दाफाश किया। मुकदमे के जांच अधिकारी और थाना प्रभारी अमृतपाल सिंह ने बताया कि सभी आरोपी फरार हो गए हैं, उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। गांव लील के कई अन्य किसानों ने बताया कि जिस जमीन को पंचायत की जमीन दिखाकर करोड़ों रुपये हड़पने की साजिश रची गई, वहां दूर दूर तक पंचायती जमीन है ही नहीं।