पंजाब में बारहवीं कक्षा की इतिहास की पुस्तकों में सिख इतिहास से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़कर लिखने पर स्टेट क्राइम ब्रांच ने तीन लेखकों समेत चार के खिलाफ जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और आपराधिक साजिश रचने समेत कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। दो हफ्ते पूर्व पंजाब सरकार ने विवादित किताबों की बिक्री और पढ़ाने पर रोक लगा दी थी।
इस मामले की शिकायत किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने की थी। वह 93 दिन से लगातार इस मामले को लेकर संघर्ष कर रहे थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि किताबों में कुछ टिप्पणियां हैं, जो सिख इतिहास के अनुसार सही नहीं हैं। ये सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाती हैं। इन किताबों में डॉ. मनजीत सिंह सोढी की मॉडर्न एबीसी ऑफ हिस्ट्री ऑफ पंजाब (मॉडर्न प्रकाशक जालंधर), डॉ. महिंदरपाल कौर की हिस्ट्री ऑफ पंजाब मल्होत्रा बुक डिपो (एमबीडी) जालंधर, एमएस मान की पंजाब का इतिहास राज प्रकाशक जालंधर शामिल हैं।
शिकायत मिलने के बाद पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड (पीएसईबी) ने विवादित पुस्तकों के विषय-वस्तु की जांच आईपीएस मल्होत्रा को सौंपी। जांच में तथ्य गलत पाए गए। ये किताबें 2007 से लेकर 2017 तक प्रचलित थीं। जांच के बाद तीनों किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उसके बाद शनिवार को क्राइम ब्रांच ने आरोपी मनजीत सिंह सोढी, महिंदरपाल पाल कौर, एमएस मान और एक अन्य अज्ञात के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
किताबों में क्या है विवादास्पद
शिकायतकर्ता ने बताया कि इतिहास किताबों में श्री गुरु नानक देव जी, श्री गुरु तेग बहादुर जी, बाबा बंदा सिंह बहादुर के अलावा कई सिख योद्धाओं के बारे में गलत जानकारी दी गई है। इससे आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश जा रहा है। वहीं इससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। कई सालों से विवाद से चल रहा है, लेकिन पहले कोई कार्रवाई नहीं गई। इसके चलते सात फरवरी 2022 को बलजीत सिंह सिरसा की अगुवाई में पक्का मोर्चा लगाया गया था।
चार और पुस्तकों की हो रही है जांच
जालंधर के प्रदीप प्रकाशक द्वारा प्रकाशित व डॉ. एसी अरोड़ा की पुस्तक पंजाब का इतिहास की भी आईपीएस मल्होत्रा जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही तीन अन्य पाठ्य-पुस्तकों जिनकी सामग्री उक्त पाठ्य-पुस्तकों से मिलती-जुलती हैं, उन्हें भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। इस बारे में रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
बोर्ड ने उक्त किताबों को 2017 तक नोटिफाई करते समय काम करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पीएसईबी द्वारा ऐसी सारी अधिसूचनाएं जो कि इन किताबों के बारे में जारी की गई हैं, उन्हें भी वापस लेने का फैसला लिया गया है।