कैप्टन ने कहा कि पंजाब संकट से निपटने के अपने कुप्रबंधन के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह से दहशत की स्थिति में है, जो उसके नेताओं के बयानों से स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि दहशत से त्रस्त पार्टी आंतरिक अराजकता से जूझ रही है और अपनी विफलताओं के दोष को दूर करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। उन्होंने कहा कि यह देखकर दुख होता है कि किस तरह से वे अपने गलत कामों को सही ठहराने के लिए खुलेआम झूठ का सहारा ले रहे हैं।
कैप्टन ने दिया, 2017 से जीत का हिसाब
कैप्टन ने कहा कि 2017 के बाद से कांग्रेस ने उनकी सरकार के नेतृत्व में पंजाब में हर चुनाव में जीत हासिल की, जो पार्टी नेतृत्व द्वारा किए जा रहे दावों के बिल्कुल विपरीत है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अभूतपूर्व 77 सीटें जीती थीं। 2019 के उपचुनाव में, कांग्रेस ने 4 में से 3 सीटें जीतीं, यहां तक कि सुखबीर बादल के गढ़ जलालाबाद से भी जीत हासिल की।
2019 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने देश में भाजपा की भारी लहर के बावजूद 13 में से 8 सीटों पर जीत हासिल की। उन्होंने आगे कहा कि इस साल फरवरी में 7 नगर निगम चुनावों में कांग्रेस ने 350 में से 281 सीटों (80.28 फीसदी) पर जीत हासिल की जबकि नगर परिषद चुनावों में पार्टी ने 109 में से 97 सीटें जीतीं। इनमें पार्टी 2965 वार्डों में से 1486 में (68 फीसदी) में विजयी रही।
कैप्टन ने आरोप लगाया कि साफ हो गया है कि पंजाब के लोगों ने उन पर भरोसा नहीं खोया है, जैसा सुरजेवाला ने दावा किया था। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे मामले को नवजोत सिंह सिद्धू के इशारे पर कुछ नेताओं/विधायकों द्वारा सुनियोजित किया गया था। कैप्टन ने कहा कि बरगाड़ी जैसे संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दे और उसके बाद पुलिस फायरिंग के मामलों पर भी हरीश रावत ने जो झूठ बोला, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी को इन झूठों के लिए राज्य में भारी चुनावी कीमत चुकानी पड़ेगी। कैप्टन ने कहा कि उनके आरोप के अनुसार, अगर बादल के साथ मेरा हाथ मिला होता, तो मैं उन्हें अदालतों में लड़ने में पिछले 13 साल नहीं लगाता।
बेअदबी के मामले सुलझाने का किया दावा
बेअदबी के मामलों में कार्रवाई नहीं करने के आरोपों को खारिज करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मार्च 2017 में कार्यभार संभालने के बाद, उनकी सरकार श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी के सभी 3 प्रमुख मामलों को सुलझाने में सफल रही, जो जून-अक्तूबर 2015 के बीच हुए थे। वास्तव में, बेअदबी की घटनाओं के वांछित तीन मुख्य आरोपी (मोहिंदर पाल उर्फ बिट्टू, सुखजिंदर सिंह उर्फ सनी और शक्ति सिंह) को कांग्रेस सरकार के सत्ता संभालने के 16 महीने के भीतर 5 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।
इसके अलावा, कोटकपूरा और बहिबल कलां फायरिंग मामलों में, कांग्रेस द्वारा राज्य की बागडोर संभालने के दो साल के भीतर, आईजीपी परमराज उमरांनगल और एसएसपी चंद्रजीत शर्मा सहित वरिष्ठतम पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले में डीजीपी सुमेध सिंह सैनी और पूर्व विधायक मंतर सिंह बराड़ समेत करीब 12 लोगों को नामजद कर चार्जशीट किया गया है। इन दोनों मामलों में 7 आरोपपत्र दायर किए गए थे, लेकिन इनमें से कुछ को हाईकोर्ट ने अटका दिया था। उन्होंने कहा कि इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं होने का पूरा ड्रामा सिद्धू और उनके सहयोगियों द्वारा रचा गया था, जिनका एकमात्र हित किसी भी तरह सत्ता हथियाना था।