कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर मनप्रीत बादल का इस्तीफा मांगने संबंधी शिरोमणि अकाली दल की मांग को हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि राज्य को आर्थिक संकट में धकेलने के लिए पूरी तरह अकाली जिम्मेदार हैं, जिसे पैरों पर खड़ा करने के लिए उनकी सरकार कड़ी मेहनत कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 साल सत्ता का सुख भोगने वाले अकालियों ने अपने निजी हितों की खातिर राज्य की आर्थिक स्थिति को औंधे मुंह गिरा दिया। मुख्यमंत्री ने पिछले कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने मजबूत आर्थिक स्थिति छोड़ी थी लेकिन अकाली-भाजपा गठजोड़ ने अपनी लोक विरोधी और बुरी नीतियों से इसे तबाह कर दिया।
उन्होंने कहा कि अकालियों और उसकी हिस्सेदार भाजपा ने अपने एक दशक लंबे शासनकाल के दौरान राज्य के खजाने का सारा पैसा बर्बाद कर दिया। कैप्टन ने दुख जताया कि अकालियों की नकारात्मक नीतियों ने निवेशकों के जज्बातों को पूरी तरह ठेस पहुंचाई, जिसके कारण उद्योग और कारोबारी राज्य से पलायन के लिए मजबूर हो गए।
इन नीतियों के कारण ही राज्य पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया और उनकी सरकार यह कर्ज उतारने के लिए संघर्ष कर रही है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि और तो और साल 2017 विधानसभा चुनाव के केवल कुछ महीने पहले तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने केंद्रीय पूल के लिए अनाज की खरीद के संबंध में राज्य पर 31000 करोड़ रुपये का कर्ज और चढ़ा दिया, जिससे पंजाब का वित्तीय संकट गहरा गया।
कहा कि उनकी सरकार को राज्य की गंभीर आर्थिक स्थिति अकालियों से विरासत के रूप में मिली है और राज्य को संकट में धकेलने वाले अकाली अब मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। कैप्टन ने कहा कि कितनी शर्म की बात है कि अपने इन कामों के लिए अफसोस जताने और लोगों से माफी मांगने की बजाय अकाली वित्तीय गड़बड़ी का दोष उनकी सरकार और वित्त मंत्री के सिर मढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि अकाली लीडरशिप को राज्य की आर्थिक स्थिति की चिंता छोड़कर अपने राजनैतिक भविष्य की फिक्र करनी चाहिए।