इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कनाडा में बसे पंजाबी मूल के चंद लोग खालिस्तान को हवा दे रहे हैं, लेकिन सारी कम्यूनिटी इसके हक में नहीं है। यह बात पक्की है कि कनाडा की कानून व्यवस्था इतनी मजबूत है कि वह अपने तरीके से इसका हल करने में सक्षम है। कनाडा के लोग रेफरेंडम 2020 के पक्षधर हैं। कनाडा के ब्रैंप्टन से सांसद रमेश संघा इन दिनों पंजाब में निजी दौरे पर हैं और अमर उजाला के साथ उन्होंने कनाडा व पंजाब और मुद्दों को लेकर खास बातचीत की।
उन्होंने कहा कि सभी पंजाबी मूल के लोगों को बदनाम नहीं किया जा सकता। कनाडा की धरती पर बसे पंजाबी अधिकतर लोग खालिस्तानी पक्षधर नहीं है। रमेश संघा का कहना है कि भारत में लोकसभा चुनावों के बाद कनाडा में संसदीय चुनाव होने हैं। फिलहाल 20 सांसद पंजाबी मूल के हैं, जिससे 19 सांसद लिबरल पार्टी से है और इस बार भी चुनावों में अधिक पंजाबी सांसदों के पहुंचने की उम्मीद है।
कनाडा की तरक्की में भारतीय मूल के लोगों का खासा योगदान है, यही वजह है कि कनाडा के दरवाजे भारतीय विद्यार्थियों के लिए खुले हैं। विद्यार्थी कनाडा की विभिन्न यूनिवर्सिटी व कॉलेजों से पढ़कर वहीं नौकरी करते हैं। लिबरल सरकार ने स्टूडेंट्स की बेहतरी के लिए काफी अच्छी व्यवस्था की हुई है। कनाडा सरकार ने इसी कारण पांच लाख से अधिक नौकरियां पैदा की हैं।