तीन साल से लगातार इस कोर्स में छात्रों की रुचि न होने के कारण पेक को इस कोर्स को बंद करने का निर्णय लिया और सीनेट के सामने इस हकीकत को रखा। सीनेट ने इस पर मुहर लगा दी। संगरूर के रहने वाले छात्र विनोद सिंह, करतार सिंह दो दिन पहले पेक पहुंचे थे। वह इस कोर्स के बारे में जानकारी लेने गए थे। एक अधिकारी ने बताया कि कोर्स यह बंद हो चुका है। दोबारा संचालन होगा या नहीं, यह पता नहीं।
इसलिए फ्लॉप हुआ कोर्स
- कोर्स संचालन से पहले पेक को एक सर्वे करना चाहिए था। विद्यार्थियों की रुचि भी देखी जानी चाहिए थी।
- कोर्स का प्रचार-प्रसार होना चाहिए था। इसके लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन माध्यमों का प्रयोग होना था।
- विद्यार्थियों को यह बताना था कि डिजाइन का बाजार बहुत बड़ा है। प्लेसमेंट भी अच्छा है।
- यह बताया जाता कि प्रतिस्पर्धा इस क्षेत्र में कम होने के कारण नौकरी आसानी से मिलती है।
- सरकारी व प्राइवेट कॉलेजों में जाकर विद्यार्थियों को इस कोर्स के फायदों के बारे में बताना चाहिए था।
- सरकारी सिस्टम है। प्रचार-प्रसार करने में आनाकानी की गई और उसका हश्र सामने है। निजी कॉलेज होता तो यह कोर्स दौड़ रहा होता।
यहां खुले हैं नौकरी के रास्ते
- किसी भी उद्योग में डिजाइनर का पद मिल सकता है
- औद्योगिक डिजाइन इंजीनियर बना जा सकता है
- मॉडलिंग, परीक्षण और उत्पादन में इसके प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता होती है
- अनुसंधान के संचालन में परियोजना डिजाइन करनी होती है, वहां इसके लिए प्रशिक्षित होना चाहिए
- किसी भी शिक्षण संस्थानों में व्याख्याता बना जा सकता है
- कंपनियों में बिजनेस डायरेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, लेक्चरर आदि की नियुक्तियां इन्हीं विद्यार्थियों से होती है