पीयू में छात्रों का प्रदर्शन
वहां भी गेट तोड़ने के प्रयास हुए लेकिन छात्राओं का उद्देश्य वह नहीं था। उनका तर्क था कि वह केवल वीसी को जगाने गए थे कि 25 नवंबर को बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। अभी भी एक दिन बीच में हैं। शुक्रवार को हुए छात्र-छात्राओं के आंदोलन का रुख व उनका आवाज बता गई कि अब अहिंसा का रास्ता यहीं खत्म हो गया। अब हालात दूसरे होंगे। चाहे यह कैंपस बीएचयू बने या फिर जेएनयू।
हम तो स्टूडेंट्स हैं, हमसे क्यों डर रहे हैं वीसी साहब
प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स का कहना है कि उन्होंने वाइस चांसलर से आठ बार कहा है कि वह धरना स्थल पर आएं और उनकी बात सुनें लेकिन वह नहीं पहुंचे। छात्राओं ने यह भी कह दिया कि वह स्टूडेंट्स हैं। वीसी गुरु और अभिभावक की तरह होता है। वह पीयू परिसर को घर मानते हुए बच्चों को अभिभावकों की तरह समझाएं, न कि डरें, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
छात्रों ने ऐलान कर दिया कि अब 25 को ही आर-पार की लड़ाई होगी। यह भी कह दिया कि पंजाब का इतिहास वीसी ने नहीं पढ़ा। यदि जान लेते तो शायद पहले ही बात मान लेते लेकिन अब स्थिति अलग होगी। डीएसडब्ल्यू, चीफ सिक्यूरिटी ऑफिसर, वार्डन आदि दूर खड़ी रहीं लेकिन पास कोई नहीं आया। छात्रों के आक्रोश का भी डर था। 25 नवंबर को एमपी धर्मवीर व थिएटर एक्टिविस्ट नीलम पहुंचेंगी। इसके अलावा कई अन्य सामाजिक कार्यकर्ता भी आ रहे हैं।