पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन यानी पुटा का चुनाव जीतने की राह आसान नहीं है। इसका प्रमुख कारण यह है कि पुटा की राजनीति आठ शिक्षकों के इर्द-गिर्द घूमती है। इनमें से अगर दो से तीन शिक्षक किसी भी ग्रुप के साथ जुड़ जाएं तो उस उम्मीदवार के ठाठ हो जाते हैं। यानी उसकी जीत पक्की हो जाती है। साथ ही यही ग्रुप अपने अपने चेहरों को भी मैदान में उतारते हैं और उसके बाद जोड़ तोड़ शुरू हो जाता है। पुटा शिक्षकों की बड़ी एसोसिएशन मानी जाती है।
इसके चुनावों पर बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों के शिक्षकों की भी नजर रहती है। वह इसलिए कि दूसरे विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से यहां का जुड़ाव किसी न किसी तरह रहा है। इस बार पुटा के चुनाव में तीन ग्रुप सामने आ रहे हैं। इसमें एक ग्रुप प्रो. देविंदर सिंह, दूसरा प्रो. राजेश गिल और तीसरा ग्रुप प्रो. एमसी सिद्धू का है। इनके पैनल लगभग तैयार हैं। बस नामों की घोषणा होना बाकी है। राजनीतिक पंडित बताते हैं कि पुटा चुनाव का नामांकन 9 अगस्त को होगा।
8 अगस्त की रात गुटों का मेलमिलाप हो सकता है। यदि समझौता किसी ने नहीं किया तो यह सभी नामांकन कराएंगे और फिर नाम वापसी वाले दिन राजनीतिक लोग जोड़ तोड़ करेंगे। जानकारों की मानें तो पीयू के 638 वोट आठ शिक्षकों के पास हैं। इसमें प्रो. केशव मल्होत्रा, प्रो. देविंदर सिंह, प्रो. नवदीप गोयल, प्रो. अजय रंगा, प्रो. जितेंद्र ग्रोवर, प्रो. अक्षय, प्रो. एमसी सिद्धू और प्रो. रोनकी राम शामिल हैं। यह आठ शिक्षक पीयू के वोटों को इधर-उधर करने का हुनर रखते हैं। साथ ही लंबे समय से पुटा में भी सक्रिय हैं।