पंजाब यूनिवर्सिटी के कई सीनेटरों ने सिंडिकेट पर मनमानी का आरोप लगाते हुए वीसी प्रो. राजकुमार को पत्र दिया है। लिखे पत्र में कहा गया है कि यदि सिंडिकेट की मनमानी पर रोक नहीं लगी तो पीयू को बड़ा नुकसान होगा। सीनेटरों ने वीसी से जल्द से जल्द इसकारास्ता निकालने का आह्वान किया है। साथ ही उन्होंने डीएसडब्ल्यू और डीन रिसर्च हटाने की मांग भी की। सीनेटर संजय टंडन, डॉ. सुभाष शर्मा, डॉ. अजय रंगा, प्रो. संगा, डॉ. जगदीश मेहता, वीरेंद्र गिल, नीरू मलिक ने इस मामले को लेकर वीसी से मुलाकात की।
उन्होंने कहा, ‘उच्च सदन सीनेट में जब यह बात पास हो जाती है कि बिना एजेंडे के किसी विषय पर चर्चा हो सकती है लेकिन निर्णय नहीं, तो सिंडिकेट उसका पालन क्यों नहीं कर रही। इसका जवाब दिया जाए। बिना एजेंडे के 26 शिक्षकों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी गई। बिना एजेंडे के डीन रिसर्च बना दिया गया। बिना एजेंडे के ही कई प्रस्ताव हर सिंडिकेट की बैठक में पास हो रहे हैं। कॉलेज की एफिलिएशन कमेटी बना दी गई जबकि इसकी जरूरत नहीं है। लाखों रुपये आए दिन बैठक कर खर्च किए जा रहे हैं। यह फिजूलखर्ची है, इस कमेटी को खत्म किया जाए।’
इसके अलावा सीनेटरों ने आरोप लगाया कि शिक्षकों व कर्मचारियों के रोस्टर के लिए सालों से बैठक नहीं की गई है जबकि कॉलेजों की मान्यता के लिए आए दिन बैठक हो रही है। उन्होंने वीसी से कहा, इस खेल को रोका जाना चाहिए। शून्य सत्र में जो विषय उठाने चाहिए वह पहले ही उठाकर उन पर निर्णय सिंडिकेट ले रही है। डेंटल शिक्षकों की प्रमोशन पॉलिसी पर निर्णय लेने की मांग की गई। यह भी कहा, पीयू के कैलेंडर का पालन नहीं किया जा रहा है। यूजीसी के नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।