हफ्ते में एक दिन 6वीं से 10वीं कक्षा के स्टूडेंट्स की एक ज्वाइंट क्लास लगेगी, जिसमें चारों कक्षाओं को एक साथ बिठाकर रियल लाइफ एक्सपीरियंस से पढ़ाया जाएगा। हर टीचर को 5-6 स्टूडेंट्स की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो उन बच्चों की परफॉर्मेंस पर नजर रखेंगे। चंडीगढ़ शिक्षा विभाग का मानना है कि इन बदलावों से बच्चों में सीखने की क्षमता और प्रवृत्ति का विकास होगा, जिसका फायदा वर्ष 2021 में होने वाले पीसा टेस्ट में मिलेगा क्योंकि इस टेस्ट के लिए भारत सरकार ने पूरे देश में से सिर्फ चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को चुना गया है।
मणिपुर में भी हर शनिवार को मनाया जाता है ‘नो बैग डे’
मणिपुर में भी हर शनिवार को ‘नो स्कूल बेग डे’ के तौर पर मनाया जाता है। मणिपुर सरकार ने इसकी घोषणा सितंबर महीने में ही कर दी थी। इस फैसले के तहत राज्य के हर स्कूल में शनिवार को 1 से 8 तक की कक्षाओं के छात्र बिना किताबों के स्कूल जाएंगे। मणिपुर में 1-8 तक की कक्षाओं के छात्रों के स्कूल बैग और पाठ्यक्रम गतिविधियों पर की गई एक अध्ययन रिपोर्ट से यह पाया गया कि छात्रों द्वारा अत्यधिक भरे और भारी भरकम बैग ले जाने से बच्चों में पेशीय विकार होने की संभावना बढ़ जाती है। कम वजनी बैग लेकर पैदल चलकर स्कूल जाने से बच्चों में पीठ दर्द कि शिकायत नहीं रहती हैं। स्कूल बैग का अत्यधिक वजन और होम वर्क का भार भी बच्चों को तनाव में लाता हैं।
बुधवार को वर्ष 2021 में होने वाले पीसा टेस्ट की तैयारियों को लेकर एक बैठक की गई। जिसमें स्कूलों के हेड्स व प्रिंसिपलों को कुछ निर्देश जारी किए गए हैं। शिक्षा का उद्देश्य कुछ किताबों या कुछ अध्यायों को रटना नहीं है, बल्कि उनसे सीखना है। हम हर शनिवार को सरकारी स्कूलों में नो बैग डे मनाएंगे, जिसको लेकर जल्द आदेश जारी कर दिए जाएंगे। - बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी, चंडीगढ़