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पीयू सीनेट में पास हुआ करोड़ों रुपयों का बजट, पंजाब से फंड का इंतजार

Sun, 17 Dec 2017 11:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab University VC Arun Grover
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पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट की बैठक में करोड़ों रुपये का बजट पास किया गया। कई मुद्दे सहमति से पास हो गए, तो कई पर गहमागहमी भी रही। पीयू के वीसी कई बार सीनेट छोड़कर बाहर चले गए। इस बार बैठक में सबसे बड़ा फैसला पीयू को इस नए वित्तीय वर्ष में 556.38 करोड़ रुपये का बजट पास करने का हुआ है। इस बार पीयू में सातवां वेतन आयोग नहीं लागू होगा। बैठक में सीनेट ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सौ करोड़ रुपये के बजट की जरूरत है। अभी तक यह बजट हमारे पास नहीं हैं।
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इस कारण हम सातवां वेतन लागू नहीं कर पाएंगे। सीनेट की बैठक में 556.38 करोड़ रुपये का बजट पंजाब यूनिवर्सिटी ने पास किया है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार 28.55 करोड़ रुपये का बजट अधिक दिया है। इस वर्ष पिछले साल की अपेक्षा 28.55 करोड़ रुपये इस वित्तीय वर्ष में अधिक दिए है। वित्तीय वर्ष 2017-18 के 527.83 रुपये दिए गए थे। साथ ही बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी को छह फीसदी अधिक ग्रांट का भुगतान करने का भी फैसला लिया गया।

पीयू को वर्ष 2017 में केंद्र की ओर से 207.80 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। पीयू को अगले वित्तीय वर्ष में 220.26 करोड़ रुपये का भुगतान ग्रांट के तौर पर किया जाएगा। वहीं, पंजाब सरकार की ओर से 27 करोड़ रुपये की ही ग्रांट दी जाएगी। इसके साथ ही पीयू के इंटरनल रेवन्यू 293.03 करोड़ रुपये को भी शामिल किया गया है।
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सातवां वेतन आयोग नहीं होगा लागू
सीनेट की बैठक में वीसी अरुण ग्रोवर ने कहा कि बजट की कमी के कारण हम सातवां वेतन आयोग लागू नहीं कर सकते हैं। हमारे पास 100 करोड़ रुपये बजट का नहीं मिला है। केंद्र सरकार की ओर से यह बजट नहीं दिया जा सकता है। इस कारण हम इसे लागू नहीं कर पाएंगे।

उन्होंने बताया कि नॉन टीचिंग स्टाफ को सातवां वेतन आयोग लागू करने के  लिए 22 करोड़ रुपये की जरूरत है। इसके लिए पंजाब सरकार की ओर से मिलने वाले बजट का इंतजार किया जा रहा है। अगर यह पंजाब सरकार की ओर से दिया गया तो भी हम सातवां वेतन आयोग केवल नॉन टीचिंग स्टाफ को ही दे पाएंगे। वहीं टीचिंग स्टाफ के लिए 34 करोड़ रुपये की जरूरत पडे़गी।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर नहीं बनी सहमति

Punjab University VC Arun Grover
पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए कई प्रोफेसर की ओर से जहां वकालत की गई। वहीं, कई ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। इस पर पीयू वीसी अरुण ग्रोवर ने कहा कि अगर किसी को पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाना है तो वह हाईकोर्ट जा सकते हैं। सभी प्रोफेसरों को यह अधिकार है कि वह अपना हक मांग सकते हैं। मैने प्रयास किया लेकिन सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के मुद्दे को इमोशनल मुद्दा बनाया गया। इस कारण इसे लागू नहीं किया जा सका है। वीसी ने अंत में साफ किया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने के मुद्दे पर कोई बात नहीं होगी।

छात्रों के माइग्रेशन को लेकर डीयूआई के नेतृत्व में कमेटी का गठन
पीयू के रीजनल सेंटर में छात्रों के माइग्रेशन को लेकर वीसी की ओर से सीनेट में डीयूआई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। जिससे कि जरूरतमंद छात्रों का ही माइग्रेशन हो सके। सीनेटर राजेश गिल ने सीनेट मीटिंग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लुधियाना, होशियारपुर, मुक्तसर सेंटर में छात्रों की घटती संख्या के बारे में जानकारी दी। बताया कि साल के अंत तक वहां चार से पांच स्टूडेंट ही बचते हैं। जिसे सुन वीसी ने साफ  किया कि माइग्रेशन के इस तरह के खेल को रोकने की जरूरत है।

गेस्ट हाउस के इस्तेमाल पर जताया ऐतराज
पीयू गेस्ट हाउस के फैकल्टी और अन्य सदस्यों के इस्तेमाल को लेकर ऐतराज जताया गया। सीनेट सदस्यों की ओर से बताया गया कि जरूरतमंद लोगों को गेस्ट हाउस का कमरा नहीं मिल पाता। उन्हें दूसरी जगह ठहरना पड़ता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

प्रिंसिपल के एक्सटेंशन मुद्दे पर हंगामा

पीयू स्टूडेंट काउंसिल - फोटो : अमर उजाला
कालेज के प्रिंसिपल को एक्सटेंशन देने के मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा हुआ। वीसी ने दो बार सीनेट बैठक सस्पेंड की। वह दो बार हंगामा होने के बाद उठकर चले गए। इसके  बाद सीनेटर प्रो. लांबा की सलाह के बाद सीनेट की बैठक हुई। इस पर वीसी ने कहा कि मेरी ओर से इस मुद्दे पर कुछ नहीं किया गया है। इस मुद्दे पर वीसी ने कमेटी बनाकर सभी का रिकार्ड इकट्ठा करने को कहा है। इसके बाद अगली छह जनवरी को होने वाली एक्सटेशन में इस पर चर्चा होगी।

पेपर री-एवेल्यूएशन में देरी को लेकर खड़े किए सवाल
एलएलबी के पेपर के री-एवेल्यूएशन का मुद्दा भी सीनेट में गूंजा। सीनेट सदस्यों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सेमेस्टर खत्म होने तक सैकड़ों छात्र री-एवेल्यूएशन के लिए एप्लाई नहीं कर पाते हैं। जिससे छात्रों का साल बरबाद होने का खतरा मंडराता है। इसके बावजूद भी इस विषय को लेकर प्रबंधन की ओर से किसी तरह के आदेश छात्र हित में जारी नहीं किए गए। इसे लेकर छात्रों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

छात्रों के माइग्रेशन को लेकर डीयूआई के नेतृत्व में कमेटी का गठन
पीयू के रीजनल सेंटर में छात्रों के माइग्रेशन को लेकर वीसी की ओर से सीनेट में डीयूआई की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया। जिससे कि जरूरतमंद छात्रों का ही माइग्रेशन हो सके। सीनेटर राजेश गिल सीनेट मीटिंग में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि लुधियाना, होशियारपुर, मुक्तसर सेंटर में छात्रों की घटती संख्या के बारे में जानकारी दी। बताया कि साल के अंत तक वहां चार से पांच स्टूडेंट ही बचते हैं। जिसे सुन वीसी ने साफ  किया कि माइग्रेशन के इस तरह के खेल को रोकने की जरूरत है।
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सीनेट की मीटिंग में इन मामलों पर फैसला

Punjab University Professor Arun Kumar Grover
वित्तीय मदद के लिए पीयू रिजर्व फंड का मामला रिव्यू होगा, मामला राजेश गिल ने उठाया।
- एनआरआई स्टूडेंट के दाखिले के लिए फीस स्ट्रेक्टचर पास किया।
- मेडिकल रिंइमबर्समेंट पीजीआई नियमानुसार ही देंगे।
- रीजनल सेंटर के लिए निर्धारित करीब पौने 2 करोड़ से रेनोवेशन का काम जल्द शुरू होगा, मामले में कमेटी बनेगी।
 - बहुउद्देशीय सभागार के सामने वाले हिस्से के लिए 10 करोड़ मंजूर।
- वीसी ऑफिस की छत पर सवा 6 लाख खर्च होंगे।
- धर्मकोट और फिरोजपुर कॉलेज के लिए 1.16 करोड़ पास।
- गेस्ट हाउस के बढ़े रेट पर मुहर।
- अगले साल से च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम कॉलेजों में।
- टीचर्स की ओर से पेपर सेटिंग के रेट बढ़ाए।
- डॉ. प्रभजोत ने रिजल्ट लेट आने का मामला उठाया।
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