दो साल पहले शुरू हुआ 10 फीसदी आरक्षण इस बार भी पंजाब यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध 196 कॉलेजों में लागू होता नहीं दिख रहा है। यह लागू होगा तो 62 हजार सीटें इन शिक्षण संस्थानों में बढ़ जाती और छात्रों को दाखिला आसानी से मिल जाता। साथ ही तमाम विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता।
हालांकि, पहले शिक्षण संस्थान अपने यहां शिक्षकों का बंदोबस्त करेंगे और अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की भी योजना बनाएंगे, लेकिन ये तर्क भी दो साल से दिया जा रहा है। इस पर काम नहीं किया गया। केंद्र सरकार ने 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान पिछले साल किया था। उसी के मुताबिक शिक्षण संस्थानों में भी इन विद्यार्थियों के लिए सीटें बढ़ाई जानी थीं।
यूजीसी का भी फरमान पीयू के पास पहुंचा। पीयू ने आगे की तैयारी शुरू की और बैठक की। कहा गया कि विश्वविद्यालय 10 फीसदी व कॉलेज 25 फीसदी सीटें बढ़ाएंगे। सीटें बढ़ाने के लिए सभी संस्थान तैयार थे, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर न होने के कारण यह प्रस्ताव परवान नहीं चढ़ सका। प्रस्ताव रखा गया कि शिक्षकों की काफी कमी है।
यदि सीटें बढ़ा दी गईं तो शिक्षकों पर अतिरिक्त भार आएगा और शिक्षण कार्य प्रभावित होगा। इसके लिए शिक्षकों की व्यवस्था पहले की जाए और विद्यार्थियों के बैठने के लिए भी अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। इस प्रस्ताव पर सभी ने मुहर लगा दी। चालू वर्ष में इसका लाभ नहीं दिया गया। दूसरे साल में उम्मीद थी लेकिन वह भी पूरी नहीं हो पाई।