अपने भविष्य को लेकर चिंतित एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री के विद्यार्थी पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। हाईकोर्ट ने उनके तर्कों को सही मानते हुए पीयू को नोटिस जारी किया है। पीयू के जवाब आने के बाद हाईकोर्ट फाइनल निर्णय सुनाएगा। छात्रों को उम्मीद है कि उन्हें रसायन विज्ञान विभाग के जरिये डिग्रियां मिलेंगी। इससे नौकरियों के रास्ते खुलेंगे।
एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री के छात्र-छात्राएं पिछले तीन वर्षों से अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका दर्द यह है कि उन्हें कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से पढ़ाया जा रहा है जबकि इस विभाग से उनका कोई सरोकार नहीं है। लंबे समय से यही विभाग छात्रों को पढ़ाता आ रहा है जबकि अन्य विश्वविद्यालयों में इस कोर्स का संचालन रसायन विज्ञान विभाग के जरिये हो रहा है।
रसायन विज्ञान विभाग के जरिये पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए सरकारी नौकरियां हैं, लेकिन कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग के पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए सरकारी सेवाओं में मौके नहीं हैं। वह प्रोफेसर आदि नहीं बन सकते। इसका कारण यह है कि कैमिकल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से जो पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है वह अधिकांश इंजीनियरिंग से जुड़ा है जबकि उन्हें रसायन विज्ञान से संबंधित जानकारियां दी जानी चाहिए।
हर दर पर गए छात्र.. कहीं से नहीं मिली राहत
छात्रों को पीयू की इस प्रक्रिया से बड़ा नुकसान हुआ। पासआउट हुए विद्यार्थियों को बेहतर जॉब नहीं मिल पाईं। नौकरियां मिलीं, लेकिन पैकेज बेहतर नहीं मिले जबकि रसायन विज्ञान के जरिये पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मोटी पगार पर कंपनियों ने नौकरियां दीं। इन तमाम समस्याओं को छात्रों ने पीयू प्रशासन को कई बार अवगत कराया। लिखित में शिकायतें दीं, लेकिन पीयू के अधिकारियों ने उनकी शिकायतों का जवाब देना उचित नहीं समझा। छात्रों का भविष्य संकट में था।
आखिर उन्हें उम्मीद केवल न्यायपालिका से थी। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पहली सुनवाई में छात्रों ने अपने तर्क बेहतर ढंग से प्रस्तुत किए। सभी विश्वविद्यालयों में चल रहे इस पाठ्यक्रम के अभिलेख प्रस्तुत किए गए। छात्रों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अब पीयू को नोटिस जारी किया है। छात्रों का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद है। जल्द ही उनके भविष्य को लेकर अच्छा निर्णय आने वाला है। मालूम हो कि अमर उजाला ने छात्रों की इस समस्या को कई बार प्रकाशित किया है।
सीनेट व सिंडिकेट ने क्यों नहीं समझा इस दर्द को?
एमएससी इंडस्ट्रियल केमेस्ट्री के विद्यार्थियों ने सीनेट व सिंडिकेट के सदस्यों को भी अपना दर्द अवगत कराया, लेकिन किसी भी सदस्य ने इसको गंभीरता से नहीं लिया। छात्रों का आरोप है कि सीनेट व सिंडिकेट सदस्यों के बच्चे यदि इस कोर्स में फंसे होते तो शायद इस पर निर्णय हो गया होता। इस समय सीनेट व पुटा चुनाव को लेकर राजनीति की जा रही है, लेकिन उनके बारे में किसी ने नहीं सोचा।
छात्रों का आरोप है कि सीनेट व सिंडिकेट केवल अपने हितों को साधने का काम कर रही है। छात्रों के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं है। बैठकों में वही मुद्दे उठाए जाते हैं जिसके जरिये उन्हें लाभ हो, बाकी मुद्दों से उनको कोई लेना देना नहीं। कहा कि सीनेट चुनाव को लेकर घमासान चल रहा है। राजनीति की जा रही है। इतनी चिंता चुनाव को लेकर हो रही है लेकिन छात्रों के भविष्य के बारे में नहीं सोचा जा रहा है।