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अटल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर का प्रस्ताव पहले चरण में पास, पंजाब यूनिवर्सिटी ने भेजा था

Wed, 17 Apr 2019 11:51 AM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ की ओर से केंद्र सरकार को भेजे गए अटल एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर ने पहली बाधा पार कर ली है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मार्च माह में हुई बैठक में यह प्रस्ताव पास कर रीडिंग कमेटी को भेज दिया है। यहां से पास होने के बाद यह फाइनल अप्रूवल के लिए स्टैंडिंग कमेटी के पास जाएगा और उसके बाद इसके लिए रकम जारी किए जाने का काम शुरू होगा। सूत्रों का कहना है कि रीडिंग कमेटी के पास ही तमाम प्रस्ताव इसलिए नहीं पहुंचते क्योंकि उन प्रस्तावों में दम नहीं होता। हवा हवाई प्रस्ताव बनाए जाते हैं, लेकिन पीयू के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार किए गए इस प्रस्ताव में दम दिखा।
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इस तरह बनाया गया प्रस्ताव
पीयू की ओर से पिछले साल नवंबर माह में वीसी प्रो. राजकुमार ने अटल एडवांस रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर का प्रस्ताव तैयार करवाया। प्रो. देविंदर मेहता की अगुवाई में भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान व इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों ने यह प्रस्ताव तैयार किया। इसका बेस तैयार किया गया कि पंजाब के अलावा आसपास के क्षेत्रों में कैंसर लगातार पैर पसार रहा है। ऐसे में अनुसंधान व मरीजों को इलाज की अधिक आवश्यकता है। बेस तैयार करने के बाद इस रिसर्च संस्थान पर 742 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव रखा गया।

रिसर्च करेगा पीयू, टाटा इंस्टीट्यूट देखेगा मरीजों को
सूत्रों का कहना है कि पीयू अब प्लानिंग कर रहा है कि वह मरीजों को देखने की बजाय केवल कैंसर पर रिसर्च करेगा और मुल्लापुर में खुलने जा रहा टाटा इंस्टीट्यूट मरीजों का इलाज करेगा। यह इसलिए किया जा रहा है कि कुछ फंड केंद्र सरकार तो कुछ टाटा इंस्टीट्यूट के जरिये मिल सके। हालांकि निर्णय केंद्र को भेजे गए प्रस्ताव पर फाइनल मुहर लगने के बाद ही लिया जाएगा।
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प्रोटॉन थैरेपी समेत कई विधियों से होगा काम

इस रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोटॉन थैरेपी पर काम करने की बात कही गई। यह उपचार व रिसर्च दोनों के लिए काम आएगी। यहां कैंसर में रिसर्च करने वाले स्कॉलर कैंसर केसों के अलावा जीनोमिक परिवर्तनशीलता, महामारी के आंकड़ों का संग्रह, विश्लेषण और सांख्यिकीय मूल्यांकन पर काम करेंगे। साथ ही मेटास्टेसिस में शामिल आणविक तंत्र को समझने के लिए बुनियादी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। इस सेंटर में जैव चिकित्सा तकनीकों को बढ़ावा दिया जाना शामिल है। कैंसर निदान के लिए विवो इमेजिंग तकनीकों और स्पेक्ट्रोमेट्रिक विधियों को व्यवहार में लाया जाएगा।

सेंटर में बनाए जाने वाले विभाग
- विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान
- जैव सूचना विज्ञान
- कैंसर इमेजिंग
- प्रवाह साइटोमेट्री कोर
- जीनोमिक्स प्रोटिओमिक्स
- ऊतक अधिग्रहण और सेलुलर सेल
- आणविक विश्लेषण कोर
- रोग की रोकथाम और प्रारंभिक निदान
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