पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के सैकड़ों नॉन टीचिंग कर्मचारी 25 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें आरक्षण में रोस्टर का लाभ नहीं दिया जा रहा है। पहले तो कर्मचारियों का डाटा जुटाने के नाम पर तीन साल निकाल दिए गए और जब डाटा तैयार हुआ तो सिंडिकेट ने उसको अप्रूवल देने की बजाए, जांच के लिए कमेटी बना दी। नॉन टीचिंग कर्मचारियों का आरोप है कि दिसंबर 2018 में बनी कमेटी ने अब तक एक बैठक नहीं की है।
पीयू एससी/एसटी/ओबीसी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने इस बारे उप राष्ट्रपति और पीयू के चांसलर एम. वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूजीसी के चेयरमैन, प्रो. डीपी सिंह और पीयू के वीसी प्रो राज कुमार को पत्र भी लिखा है। एससी एसटी इंप्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह का कहना है कि पीयू अपने टीचिंग और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों के बीच सालों से भेदभाव करता आया है।
टीचिंग कर्मचारियों को साल 2008 में ही प्रोमोशन में आरक्षण का लाभ का लाभ मिल गया, लेकिन नॉन-टीचिंग कर्मचारी अभी तक इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब पानी सिर के उपर जा चुका है। 25 अप्रैल को 100 से ज्यादा कर्मचारी छुट्टी लेकर धरने पर बैठेंगे। अगर मांगे फिर भी नहीं मानी जाएगी तो 28 अप्रैल को पीयू में कन्वोकेशन है, जिसमें उप राष्ट्रपति और पीयू के चांसलर एम. वेंकैया नायडू आ रहे हैं। उस दिन तक यह धरना जारी रहेगा।
गौरतलब है कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान साल 1950 में किया गया था और उसी के साथ यह देश भर के शिक्षण संस्थानों में लागू हो गया। आरक्षण को संस्थान कैसे लागू करेंगे, उसके लिए रोस्टर तैयार होता है। यह भी सब जगह हो गया है पर पंजाब यूनिवर्सिटी के नॉन टीचिंग कर्मचारियों को इसका लाभ अब तक नहीं मिल सका है।