पंजाब यूनिवर्सिटी में नौ दिन तक चले पुस्तक मेले में युवाओं ने खासा रुझान दिखाया। इनमें यूनिवर्सिटी और कॉलेज के विद्यार्थी ज्यादा रहे। क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह ‘पाश’, प्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम, मशहूर शायर फैज अहमद ‘फैज’, जौन एलिया, शिव कुमार बटालवी, डॉ. दलीप कौर टिवाणा, गुलजार, भीष्म साहनी युवाओं की खास पसंद रहे। इन लेखकों की किताबों का स्टॉक रविवार को पुस्तक मेले के अंतिम दिन तक खत्म हो गया। प्रकाशनों में चेतना प्रकाशन की सबसे ज्यादा चार लाख रुपये से अधिक की किताबें बिकीं। अन्य प्रकाशनों की सेल 40 हजार से 2 लाख के बीच रही।
चेतना प्रकाशन के सुमित गुलाटी ने बताया कि युवाओं ने पंजाबी-सूफी, पाकिस्तानी शायर और कविताओं की किताबों की ज्यादा मांग रही। लेखकों में पाश, जौन एलिया, अमृता प्रीतम, गुरतेज, हरमन, डॉ. जगतार, विजय विवेक, बलदेव सिंह, किरपाल किजक और परमिंदर सोढी की मांग ज्यादा रही। लड़कियों ने बशीर बद्र की किताबें ज्यादा खरीदीं। वहीं सुकरात के पंजाबी अनुवाद की भी 100 से ज्यादा कॉपियां बिकीं। आरसी प्रकाशन के रनजीत सिंह ने बताया कि उनकी स्टॉल पर हर दूसरे ग्राहक ने उनके पंजाबी लेखिका डा. दलीप कौर टिवाणा और अमृता प्रीतम की किताब और उनकी अनुवादित कॉपियों की मांग की।
साथ ही वीना वर्मा के उपन्यास और कहानियों की किताबों की मांग रही। अंतिम तीन-चार दिन अच्छी सेल हुई।वहीं, आधार प्रकाशन के अनूप कुमार ने बताया कि उनके पास हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी की किताबें और अनुवाद था। हर भाषा में अवतार सिंह ‘पाश’, अमृता प्रीतम और शिव कुमार बटालवी ही सबसे ज्यादा बिके। वहीं प्रकाशन संस्थान के मनोज शर्मा ने बताया कि हिंदी थर्ड लैंग्वेज होने के कारण उन्हें पीयू में निराश होना पड़ा। प्रचार की कमी के कारण पीयू से बाहर के लोग बहुत कम आए।
गुलजार, फैज और साहनी का स्टॉक हुआ खत्म
राजकमल प्रकाशन के मनीष पांडे ने बताया कि उनकी स्टॉल पर गुलजार, फैज अहमद फैज, भीष्म साहनी, श्रीलाल शुक्ल, इब्ने इंशा की ‘उर्दू की आखिरी किताब’, रवीश कुमार की ‘बोलना ही है लोकतंत्र, संस्कृति और राष्ट्र के बारे में’ और कुमार विश्वास की ‘फिर मेरी याद’ का स्टॉक रविवार को खत्म हो गया। युवाओं ने शायरी और कविताओं की किताबें ज्यादा खरीदीं। मनीष ने बताया कि पीयू में हमारी उम्मीद से ज्यादा दो से ढाई लाख रुपये के करीब किताबों की बिक्री हुई हैं।
101 में से 10 स्टॉल एनबीटी की
पीयू बुक फेयर में 101 स्टॉल में 10 स्टॉलें एनबीटी की थीं। एनबीटी के राजेश कुमार ने बताया कि संविधान, संसद, भगत सिंह, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और बच्चों के लिटरेचर की किताबें ज्यादा खरीदी गईं। आधार प्रकाशन के चंद्रभान ने बताया कि उनके यहां पाश की संपूर्ण कविताएं और सबसे खतरनाक, भगत सिंह के दस्तावेज सबसे ज्यादा खरीदे गए। उनके यहां 35 से 40 हजार रुपये तक की किताबें बिकीं।