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BA, MA पास प्राइमरी टीचरों के लिए सरकारी फरमान, खड़ी हुई नई मुसीबत

Fri, 15 Sep 2017 02:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्राइमरी स्कूल शिक्षक - फोटो : demo pic
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प्राइमरी स्कूलों में शिक्षण कार्य करने वाले शिक्षकों के लिए डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) कोर्स की अनिवार्यता गले की फांस बन गई है। इस कोर्स को करने केलिए शिक्षक का बारहवीं में 50 प्रतिशत अंक (आरक्षित शिक्षक को पांच प्रतिशत की छूट) होने जरूरी हैं। अब समस्या यह है कि बहुत से कार्यरत बीए व एमए शिक्षक  तोऐसे हैं, जिन्होंने अपने शिक्षण काल में बारहवीं कक्षा नहीं बल्कि प्रेप (पहले 11वीं-12वीं के समकक्ष क्लास) की हुई है।
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अब ऐसे शिक्षकों के लिए डीईएलईडी की अनिवार्यता बड़ी टेंशन बन गई है, क्योंकि यदि अप्रैल 2019 तक यह कोर्स नहीं किया गया, तो उन्हें शैक्षणिक कार्य के लिए अयोग्य घोषित करते हुए सेवा में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह अनिवार्यता सरकारी, सहायता प्राप्त व गैरसरकारी सभी स्कूलों के शिक्षकों के लिए तय होगी।

सरकार ने आरटीई के तहत जारी किया सर्कुलर
- राइट टू एजुकेशन एक्ट 2009 की धारा 23 के तहत एलीमेंट्री शिक्षक के लिए न्यूनतम योग्यता घोषित की गई है
- जो एलीमेंट्री शिक्षक पहली से पांचवीं कक्षा को पढ़ाते हैं उन्हें डीएलएड कोर्स करना और बारहवीं में 50 फीसद अंक  लेना अनिवार्य है
- जो एलीमेंट्री शिक्षक छठी से आठवीं कक्षा को पढ़ा रहे हैं। उनके लिए डीएलएड कोर्स के साथ-साथ बीएड और स्नातक होना भी अनिवार्य है
- एलीमेंट्री शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता के लिए अनिवार्य डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) कोर्स करने के लिए बारहवीं में 50 फीसद अंक होना अनिवार्य है।
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- हरियाणा सरकार ने संबंधित सर्कुलर सभी सरकारी, सहायता प्राप्त व प्राइवेट स्कूलों में प्रेषित कर दिया है।
- निर्देशों में कहा गया है कि एलीमेंट्री शिक्षक आरटीई के तहत तय की गई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता डीएलएड कोर्स को अप्रैल 2019 तक कर लें, वरना उन शिक्षकों को सेवा में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- सभी स्कूलों के प्राचार्यों को निर्देश है कि वे इस बात का प्रमाण पत्र विभाग को देंगे कि उनके एलीमेंट्री शिक्षकों ने न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कोर्स डीएलएड कर लिया है, झूठ बोला तो होगी बड़ी कार्रवाई

इन शिक्षकों के लिए टेंशन बना कोर्स
अप्रैल 2019 तक इस कोर्स को करना अनिवार्य है, लेकिन समस्या उन शिक्षकों के लिए जिन्होंने बारहवीं नहीं की, बल्कि प्रेप की थी।  हरियाणा में सन 1983-84 से पहले ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा नहीं होती थी। दसवीं के बाद छात्र एक कक्षा (प्रेप) करते थे। उसके बाद सीधे ग्रेजुएशन की पढ़ाई शुरू हो जाती थी, लेकिन शैक्षणिक सत्र 1984-85 में प्रेप को खत्म कर दिया गया और ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षा शुरू कर दी गई है।

आज सभी स्कूलों में बहुत से शिक्षक ऐसे हैं, जिन्होंने बारहवीं की बजाए प्रेप की है। बहुत से ऐसे भी है, जिनकी प्रेप में भी 50 फीसद अंक नहीं है। अब बड़ी समस्या यह है कि यह शिक्षक डीएलएड कोर्स को कैसे कर पाएंगें। उधर, इस संबंध में निदेशालय एलीमेंट्री एजुकेशन हरियाणा की अतिरिक्त निदेशक वंदना डिसोडिया का कहना है कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तो अनिवार्य रहेगी, इस बारे में भी विभाग कुछ हल निकालेगा।
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