पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन को वीरवार बजट के हिस्से की 48 करोड़ की ग्रांट जारी करने की चिट्ठी मिल गई है। आर्थिक तंगी में गुजर रही पंजाब यूनिवर्सिटी को ग्रांट मिलने से अब कर्मचारियों को दिसंबर का वेतन समय पर मिलने की उम्मीद बंध गई है।
केंद्र सरकार और यूजीसी द्वारा पूरी ग्रांट नहीं दिए जाने के मामले की सुनवाई पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चल रही है। कोर्ट ने यूजीसी को ग्रांट जारी करने के बारे में निर्देश जारी किए थे। आगामी 15 नवंबर को यूजीसी मीटिंग में यह मामला उठाया जाना था,लेकिन उससे पहले ही यूजीसी ने 42 करोड़ की ग्रांट जारी कर दी है।
पीयू को जारी हुई 42 करोड़ की ग्रांट 2016-17 के प्रस्तावित बजट 176 करोड़ का हिस्सा है। वित्तीय बजट पीयू को 132 करोड़ राशि ही मिली है। जबकि पीयू द्वारा यूजीसी को नॉन प्लान के तहत 277 करोड़ का प्रपोजल पीयू ने भेजा हुआ है।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को पीयू को प्रतिवर्ष दिए जाने वाली ग्रांट को बढ़ाने और पिछली बकाया राशि जारी करने को कहा था। पंजाब पिछले तीन साल से अपने हिस्से का पैसा भी नहीं दे रहा। केंद्र सरकार ने भी पीयू को मिले वाले ग्रांट की राशि को 176 करोड़ रुपये से नहीं बढ़ाया है लिहाजा अब दोनों ही सरकारों को ग्रांट की यह राशि बढ़ाए जाने के हाईकोर्ट ने निर्देश जारी किए हैं। पीयू ने हाईकोर्ट में बताया कि 2013-14 से अब तक 101 करोड़ का घाटा उठाना पड़ा है। 2014-15 में पीयू को 16 करोड़ 26 लाख, 2015-16 में 26 करोड़ 86 लाख और मौजूदा वित्तीय वर्ष में 56 करोड़ 60 लाख रुपये का घाटा उठाना पड़ा है। इस लिहाज से अब तक पीयू का कुल घाटा 101 करोड़ से अघिक हो चुका है।
गौरतलब है कि पंजाब यूनिवर्सिटी की वित्तीय हालत को लेकर कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर ने सीनेट में कहा था कि फंड की कमी के कारण जनवरी 2017 तक यूनिवर्सिटी बंद होने के हालात पैदा हो जाएंगे। इस मामले पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए पहले पीयू कुलपति और फिर यूजीसी और केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे।