छह माह का अल्ट्रासाउंड कोर्स करने वाले अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट को अब अपनी काबलियत की परीक्षा देनी होगी। यदि वे परीक्षा में पास नहीं हुए तो उन्हें यह कोर्स दोबारा करना होगा। बिना परीक्षा पास किये वह अल्ट्रासाउंड नहीं कर पाएंगे। इस वजह से सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच कर रहे डॉक्टरों को शायद खास फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन निजी जांच केंद्र संचालकों के लिए मुश्किल हो सकती है।
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स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड करने के लिए बनाए गए सिक्स मंथ ट्रेनिंग प्रोग्राम कोर्स के लिए नियमावली लागू कर दी है। इसके तहत अब तक छह माह का अल्ट्रासाउंड कोर्स करने वाले सभी डॉक्टरों को लिखित और प्रेक्टिकल की परीक्षा देनी अनिवार्य कर दी गई है। इस परीक्षा में फेल होने वाले डॉक्टर को कोर्स की मान्यता नहीं मिलेगी।
इस नियम की सबसे अधिक मार निजी अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट पर पड़ने वाली है, क्योंकि उनका सारा सेटअप परीक्षा पास किए बिना बेकार हो जाएगा। वहीं, सरकारी डॉक्टरों को यह परीक्षा पास किये बिना अल्ट्रासाउंड जांच करने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि वह अपनी मेडिकल आफिसर की ड्यूटी कर सकेंगे।
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रेडियोलॉजिस्ट की काफी कमी
मुख्यातिथि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इन डॉक्टरों को सम्मानित किया।
सूबे में रेडियोलॉजिस्ट की काफी कमी है। इसके चलते मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। नियम के तहत ऐसी जांच के लिए एमबीबीएस डॉक्टर को दो साल का डिप्लोमा कोर्स या तीन साल की रेडियोलॉजिस्ट की डिग्री करनी होती है। इस डिग्री के मिलने पर ही वे रेडियोलाजी से जुड़ी सभी जांच करने के लिए मान्य होते हैं।
यह डिप्लोमा अथवा डिग्री लेने में दो से तीन साल का वक्त लग जाता है। इस वजह से रेडियोलॉजिस्ट की कमी बनी रहती है। यही वजह थी कि सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए छह माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किया था।
इसके बाद एमबीबीएस डॉक्टर को अल्ट्रासाउंड जांच करने की अनुमति मिल गई थी। लेकिन अब छह माह का प्रशिक्षण कार्यक्रम हासिल करने वालों को परीक्षा पास करनी होगी तभी वह अल्ट्रासाउंड कर पाएंगे।
2017 के बाद परीक्षा पास करने वाले ही करेंगे जांच
अध्ययन बताते हैं कि इंजेक्शन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधकों में से है।
नियमानुसार साल 2017 तक छह माह का प्रशिक्षण कोर्स कर चुके सभी अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट को परीक्षा पास करनी जरूरी होगी। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) के रेडियोलोजी विभाग और दिल्ली में यह कोर्स कराए गए थे। अनुमान है कि इस परीक्षा को पास करने की अनिवार्यता लागू होने से प्रदेश के तकरीबन 500 अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट पर इसका असर पडे़गा।
काबिल ही करेंगे जांच
नया नियम अयोग्य अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट को बाहर का रास्ता दिखाएगा। इससे काबिल डॉक्टर ही मरीजों की जांच कर सकेंगे। इसके बाद उपचार की क्वालिटी बढ़ेगी। दूसरे पहलू को देखें तो यदि इस परीक्षा में कई अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट फेल होते हैं तो हर शहर में अल्ट्रासाउंड की जांच पर खतरे के बादल मंडरा सकते हैं।
बोले अधिकारी
अल्ट्रासोनोलॉजिस्ट के लिए परीक्षा पास करना अनिवार्य होगा। इसके बिना छह माह का प्रशिक्षण कोर्स करने वाला अल्ट्रासाउंड की जांच नहीं कर सकेगा। परीक्षा पास करने की अनिवार्यता से जांच की क्वालिटी बेहतर होगी। आगे भी जो यह कोर्स करेगा, उसके लिए परीक्षा पास करनी अनिवार्य होगी।
- डॉ. रोहताश यादव, विभागाध्यक्ष रेडियोलॉजी, पीजीआईएमएस