भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक।
जिस रफ्तार से पंजाब सरकार का खर्च और कर्ज बढ़ रहा, उतनी रफ्तार से आमदनी नहीं बढ़ी। यह खुलासा शुक्रवार को पंजाब विधानसभा के बजट सत्र में पेश की गई भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग)
की पंजाब संबंधी वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य वित्तीय सुधार के मार्ग पर है, हालांकि प्रदेश सरकार ने 14वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन एक्ट 2003 में अब तक संशोधन नहीं किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2018-19 के दौरान राजस्व प्राप्तियां और पूंजीगत प्राप्तियां क्रमश: 39023 करोड़ और 11501 करोड़ से बढ़कर 62269 करोड़ और 23788 करोड़ हो गईं। इस अवधि के दौरान राजस्व प्राप्तियों में औसतन 12.21 प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि हुई। वहीं, राजस्व खर्च वर्ष 2017-18 के दौरान 20.71 प्रतिशत की दर से बढ़ा। कुल खर्च में विकास खर्च का हिस्सा 50.24 प्रतिशत ही रहा, जो कि सामान्य श्रेणी राज्य (जीसीएस) की औसत (67.04 प्रतिशत) से कम था।
खास बात यह भी रही कि राज्य में पिछली अकाली-भाजपा सरकार के दौरान 2014-15 में विकास खर्च 52.04 प्रतिशत था , जो मौजूदा सरकार के दौरान 2018-19 में 50.24 प्रतिशत रह गया। शिक्षा और सेहत के क्षेत्र में खर्च का अनुपात भी जीसीएस राज्यों की औसत से कम रहा।
शिक्षा पर 2014-15 में 15.25 प्रतिशत का खर्च 2018-19 में घटकर केवल 12.99 प्रतिशत रह गया। इसी तरह स्वास्थ्य पर भी वर्ष 2014-15 में किया गया खर्च का हिस्सा 4.73 प्रतिशत से घटकर 2018-19 में 4.10 प्रतिशत रह गया। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2019 को राज्य की सभी वित्तीय देनदारियां 211917 करोड़ थी, जोकि जीएसडीपी का 40.61 प्रतिशत और राजस्व प्राप्तियों का 340.33 प्रतिशत थी।