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हरियाणा में अब खुशी और गम के मौके पर कैदियों को मिलेगी फरलो, कैबिनेट ने लिया फैसला

Wed, 06 Mar 2019 12:45 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर
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हरियाणा की जेलों में बंद कैदियों को अब सामान्य नियमानुसार फरलो के साथ-साथ परिवार के खुशी और गम के मौकों पर भी फरलो मिल सकेगी। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में खूंखार कैदियों के अलावा अन्य कैदियों के लिए विशेष प्रावधान करने के लिए हरियाणा सदाचारी कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम, 1988 में संशोधन को स्वीकृति दी गई।

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संशोधन के अनुसार खूंखार कैदी के अलावा अन्य कैदियों को संबंधित जेल अधीक्षक द्वारा तय की जाने वाली 48 घंटे की अवधि के लिए सशस्त्र पुलिस एस्कॉर्ट के तहत, उसके पौत्र-पौत्री या सहोदर के विवाह में शामिल होने या उसके दादा-दादी, माता-पिता, दादा ससुर, दादी सास, सहोदर, बच्चे या पोता-पोती के मृत्यु अनुष्ठान में उपस्थित होने के लिए अस्थायी आधार पर या फरलो पर छोड़ा जाएगा।

 खूंखार कैदी के अलावा अन्य अपराधी को उसकी बेटी की शादी में शामिल होने के लिए सशस्त्र पुलिस एस्कॉर्ट के तहत 96 घंटे और बेटे की शादी में शामिल होने के लिए 72 घंटे के लिए अस्थायी आधार पर छोड़ा जाएगा। जिसका संबंधित जेल अधीक्षक द्वारा निर्णय लिया जा सकता है। वह 24 घंटे के भीतर इस प्रकार रिहाई किए जा रहे बंदी के पूर्ण ब्योरा सहित संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को सूचित करेगा। 
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इससे पहले अधिनियम में उपधारा 5 ए में कट्टर कैदियों के अलावा अन्य सजायाफ्ता कैदियों के लिए इस तरह का प्रावधान उपलब्ध नहीं था। हालांकि अब इस विसंगति को दूर करने के लिए उपधारा 5बी को सम्मिलित करके अधिनियम में संशोधन किया गया है।

अब थर्ड पार्टी को सरेंडर हो सकेगा कॉलोनियों का लाइसेंस
हरियाणा में अब यदि किसी कॉलोनी को डेवलप करने के दौरान कालोनाइजर व डेवलपर को किसी प्रकार की आर्थिक व अन्य तरह की दिक्कत आ रही है तो वे अपना लाइसेंस सरेंडर कर सकेगा। इसके लिए मंगलवार को हरियाणा कैबिनेट की बैठक में लाइसेंस छोड़ने से संबंधित नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई। लेकिन अपना लाइसेंस सरेंडर करते समय थर्ड पार्टी को ट्रांसफर करने की स्थिति में कालोनाइजर को संबंधित कालोनियों के अलॉटियों से सहमति लेनी होगी। इसके बाद ही लाइसेंस सरेंडर के बाद थर्ड पार्टी को ट्रांसफर माना जाएगा।

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