दिल्ली-अमृतसर रेलमार्ग को बाधित करने वाले किसान-मजदूरों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा कि सरहद पर तनाव है और आप इतने संवेदनशील मार्ग में रुकावट डाल रहे हो। ऐसा लगता है इनके दिल में देश के जवानों और शहीदों के लिए कोई इज्जत नहीं है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए किसान मजूदर संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतनाम सिंह पन्नू को तलब कर लिया है।
इसके अलावा पंजाब के मुख्य सचिव, गृह मंत्रालय, डीआरएम फिरोजपुर डिवीजन, डीजीपी पंजाब, एसएसपी अमृतसर तथा डीसी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। रेल ट्रैक खुलवाने के लिए पटियाला निवासी मोहित कपूर की याचिका पर सुनवाई शुरू होते ही उनके वकील अरुण गुप्ता और सीनियर एडवोकेट पुनीत बाली ने हाईकोर्ट को बताया कि यह मामला बेहद गंभीर है।
किसान-मजदूर संगठन ने अपनी मांगों को लेकर इससे पहले 13 फरवरी को लोकल लाइन ठप की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात करवाई गई। अमृतसर दौरे के कारण दूसरे दौर की बैठक नहीं हो सकी जो 5 मार्च को निर्धारित की गई थी। लेकिन इससे पहले ही 4 मार्च को सैकड़ों की संख्या में लोग अमृतसर के जंडियाला में एकत्रित हो गए और दिल्ली-अमृतसर रेलमार्ग ठप कर दिया। याची ने कहा कि यह मार्ग बेहद अहम है और कई संवेदनशील स्थानों पर जाने का मार्ग भी है। रेल मार्ग सेना के लिए भी बेहद अहम है और वर्तमान में सरहद पर वैसे ही तनाव की स्थिति बनी है।
पंजाब सरकार ने कहा- भीड़ को हटाने की करेंगे कोशिश
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से कहा गया कि वह पूरा प्रयास करेंगे कि भीड़ को वहां से हटाकर किसी अन्य स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति दी जाए। पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने बताया कि इस धरने के कारण 85 ट्रेनें रद्द और डाइवर्ट हुई हैं। इससे 85 हजार यात्री प्रभावित हुए हैं।