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बजट आत्मनिर्भरता को समर्पित

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चंडीगढ़। साल 2021-22 का बजट आत्मनिर्भरता को समर्पित किया गया है। इसके मुख्यत: छह स्तंभ हैं। इनमें स्वास्थ्य विकास, आर्थिक व भौतिक विकास, मिश्रित विकास, मानव संसाधन, सरकारी हस्तक्षेप को कम करना व रिसर्च डेवलपमेंट शामिल है। इन सभी स्तंभ की मजबूती के लिए आवंटित बजट देश में एक बड़ा विकास लाएगा। किसानों की मजबूती के लिए लोन बजट काफी बढ़ाया गया है।
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कोरोना काल में हेल्थ सेक्टर का बजट 137 गुना बढ़ाने का सीधा अर्थ है कि गांव-गांव में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचेंगी। इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा तो ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर ही उच्च स्तर का इलाज मिलेगा। लोगों को दूरस्थ केंद्रों नहीं भागना होगा। यह बजट हर गांव को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ेगा।
आर्थिक व भौतिक ढांचे के अंतर्गत हर गांव को बिजली से रोशनी किए जाने की योजना है। लोगों को सस्ता पानी भी मुहैया होगा। गांवों के मुख्य मार्गों को हाईवे से जोड़कर लोगों के विकास की रफ्तार को बढ़ाया जाएगा। रेल नेटवर्क पर 1.10 लाख करोड़ व्यय होंगे यानी रेलों की संख्या व सुविधाएं बढ़ेंगी तो लोगों को टिकट की वेटिंग कंफर्म कराने के लिए अधिक समय नहीं लगेगा। ट्रेनों के फेरे भी बढ़ेंगे और हर क्षेत्र तक रेल पहुंचाने की योजना है।
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मिश्रित विकास के अंतर्गत कृषि क्षेत्र को मजबूत किया गया है। किसान क्रेडिट को बढ़ाकर 16.5 लाख करोड़ किया गया है। किसानों को पैसे के लिए साहूकारों के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। वह बैंक में जाएंगे और लोन लेकर काम चलाएंगे। बजट में यह भी बताया गया है कि एमएसपी 1.5 गुना पहले ही बढ़ा दी गई है यानी इस बजट के जरिए वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की योजना सफल होगी। एक भारत, एक राशन कार्ड योजना अनूठी है। बिहार हो या उत्तर प्रदेश या फिर किसी भी राज्य के गरीब लोग। वह देश के किसी भी हिस्से में जाएंगे तो वहां भी राशन कार्ड के जरिए अनाज, चावल, चीनी आदि ले सकेंगे। इससे गरीब जनता की जेब पर अतिरिक्त भार कम होगा।
रिसर्च एंड डेवलपमेंट के जरिये नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना होगी। इसे 50 हजार करोड़ दिए जाएंगे। इससे रिसर्च को पंख लगेंगे। जब वैज्ञानिकों केे रिसर्च के लिए पर्याप्त बजट मिलेगा तो हर क्षेत्र व समाज का विकास होगा। तकनीक आएंगी तो वह जीवन को और आसान बनाएंगी। सरकारी हस्तक्षेप कम कर सरकार योजनाओं में पारदर्शिता लाएगी। इसके जरिए भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। इतिहास में पहली बार डिजिटल सेंसेक्स तैयार होगा, यह अपने में अनोखा प्रयोग है। 75 साल से अधिक बुजुर्गों को आईटीआर नहीं भरनी होगी। यह सीनियर सिटीजन को बड़ा लाभ होगा।
मानव संसाधन के तहत 100 सैनिक स्कूल खुलेंगे। साथ ही ट्राइबल एरिया में 750 एकलव्य स्कूल खुलेंगे। इससे बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा में आ सकेंगे। साथ ही बच्चों को उनके घरों के आसपास ही बेहतर शिक्षा मिल सकेगी। स्किल इंडिया के जरिए कौशल विकास की बात कही गई है। कुल मिलाकर इंफ्रास्ट्रक्चर हर क्षेत्र में जाएगा तो रोजगार के रास्ते भी खुलेंगे।
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- प्रो. मधुर महाजन, अर्थशास्त्री
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