चंडीगढ़ पीजीआई में भर्ती एक युवक के ब्रेनडेड घोषित होने पर परिजनों ने मिसाल कायम कर उसके अंगदान का निर्णय लिया। इसके बाद युवक के लिवर को पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल एक मरीज में प्रत्यारोपित किया गया जबकि हृदय और फेफड़े को क्रमशः हवाई मार्ग से गुरुग्राम और चेन्नई भेजा गया। इसके लिए पीजीआई से एयरपोर्ट तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। हवाई मार्ग से बेहद कम समय में दोनों अंगों को दो जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाकर उनका जीवन बचा लिया गया।
पीजीआई प्रशासन के अनुसार अंगदाता परिवार ने अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए अजनबी मरीजों के जीवन में खुशियां लौटाने का निर्णय लिया। इसके बाद समय रहते अंगदान की प्रक्रिया पूरी कर अंगों को सुरक्षित रखते हुए प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों तक पहुंचाने में सफलता प्राप्त की गई। पीजीआई में लिवर के मिलान का मरीज उपलब्ध होने पर यहीं पर उसका प्रत्यारोपण किया गया जबकि फेफड़ा और हृदय का मिलान न होने पर बिना समय गवाएं, उसके लिए देश के अन्य शहरों से संपर्क किया गया। इसके बाद चेन्नई में फेफड़े और गुरुग्राम में हृदय के मैचिंग के मरीज की जानकारी मिली। पीजीआई प्रशासन ने तत्काल ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था बहाल कर रख ट्रैफिक पुलिस की मदद से अंगों को एयरपोर्ट और फिर वहां से गंतव्य तक पहुंचाया।
ग्रीन कॉरिडोर के चलते थोड़ी देर रोक गया यातायात
दोपहर लगभग ढाई बजे मटका चौक पर सेक्टर-17 और 18 की विभाजित सड़क पर कुछ देर के लिए पुलिस को यातायात रोकना पड़ा। इस दौरान एंबुलेंस के जरिए पीजीआई से ब्रेनडेड युवक के अंगों को एयरपोर्ट पहुंचाया गया। इस दौरान लोगों को ट्रैफिक क्लीयरेंस के लिए कुछ देर इंतजार करना पड़ा। पीजीआई रोटो के नोडल अधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि पुलिस और ट्रैफिक विभाग के साथ संपर्क कर ग्रीन कॉरिडोर बनवाया गया और अंगदाता के अंगों को पहले एयरपोर्ट और फिर गुरुग्राम व चेन्नई पहुंचाया गया। ग्रीन कॉरिडोर में सहयोग के लिए मोहाली पुलिस, सीआईएसएफ और हवाई अड्डे के कर्मचारियों ने सराहनीय कार्य किया।