भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के अध्यक्ष बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि किसान आंदोलन अब देश के 700 जिलों में पहुंच गया है। दिल्ली उपद्रव के बाद स्थिर हुआ आंदोलन गति पकड़ने लगा है। दो फरवरी तक फिर से आंदोलन चरम पर पहुंच जाएगा।
उन्होंने कहा कि लाल किला हमारी शान है और हमें भी लाल किले में हुए उपद्रव पर खेद है। अब किसानों को आंदोलन को बनाए रखने के लिए भाईचारा बनाए रखना होगा, जिससे हम सरकार के आंदोलन को समाप्त करने के मंसूबों को खत्म कर सकें।
चंडीगढ़ में शनिवार को किसान भवन में पत्रकारों से बातचीत में राजेवाल ने कहा कि 26 नवंबर से कृषि कानूनों के विरोध में किसान अपना आंदोलन शांति पूर्वक संचालित कर रहे हैं। किसानों की जायज मांगों के कारण अब आंदोलन ने जन आंदोलन का रूप ले लिया है। हालांकि सरकारें आंदोलन को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। धरना स्थल पर आंदोलन को बाधित करने के लिए सरकारों ने नेट बंद करा दिया है। इसके बावजूद जन संचार के जरिए किसान अपनी बात को आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि आंदोलन फिर से गति पकड़ चुका है, इसलिए अब पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के किसानों को भाईचारा बनाना जरूरी हो गया है। उकसावे पर किसान अपना आपा न खोएं और शांत होकर आंदोलन को मजबूत करने में सहयोग दें। अब केंद्र सरकार को भी अपनी हठधर्मिता छोड़कर लोगों की भावनाओं की कद्र कर कृषि कानूनों को वापस लेना चाहिए।
गाजीपुर बॉर्डर की घटना पर राजेवाल ने कहा कि भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने आंदोलन को एक बार फिर स्थापित करने का काम किया है। किसानों के लिए वह प्रेरणा का जरिया बन गए हैं। किसान यूनियनों को उन्हे सम्मानित करना चाहिए, जल्द ही राजेवाल भाकियू टिकैत का सम्मान करेगी।
सरकार के बुलावे पर बातचीत को तैयार
एक सवाल पर बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि इतना सब होने के बाद भी किसान विवाद को सुलझाने में विश्वास रखते हैं, यदि कृषि कानूनों को लेकर सरकार किसान यूनियनों को बुलाती है तो वह भी बातचीत के लिए तैयार हैं। शर्त सिर्फ यही होगी कि किसान विरोधी कृषि कानूनों का सरकार स्थायी समाधान लेकर आए।
एनआईए के नोटिस का देंगे जवाब
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) के नोटिस पर राजेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार नोटिस के जरिए किसान नेताओं पर दवाब बनाना चाहती है। किसानों पर कार्रवाई के बाद किसानों को नोटिस प्राप्त हुए। खैर, अब किसान नेता नोटिस का जवाब देंगे। दीप सिद्धू के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसने जो करना था कर दिया। अब इस पर बात करना बेमानी होगा।