हल्लोमाजरा में एक प्लाट के कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने भाजपा पार्षद सतीश कुमार कैंथ को अंतरिम राहत देते हुए 1 अप्रैल तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा कि मामले में तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता को अपनी बात कहने का मौका दिया जाना चाहिए।
इसके लिए कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपये के बेल बांड पर राहत दी। साथ ही उन्हें पुलिस इंवेस्टिगेशन ज्वाइन करने को कहा है। वहीं मुख्य याचिका पर 1 अप्रैल को बहस होगी। हल्लोमाजरा के दीप कांप्लेक्स निवासी सतीश कैंथ के खिलाफ सेक्टर-31 पुलिस थाने में 14 मार्च 2016 को दर्ज आपराधिक अतिक्रमण और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज किया था।
इससे पहले कैंथ की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सेक्टर-31 थाना पुलिस ने जवाब दायर किया। इसमें उन्होंने कैंथ को अग्रिम जमानत देने का विरोध किया। पुलिस ने कहा है कि केस की जांच अभी चल रही है। ऐसे में अगर कैंथ को जमानत का लाभ दिया जाता है तो वह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही वह शिकायतकर्ता और गवाहों को धमका सकते हैं, क्योंकि वह प्रभावी व्यक्ति हैं। ऐसे में उनकी याचिका खारिज की जानी चाहिए।
पुलिस के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों की जांच और एडीए लीगल की राय के बाद कैंथ के खिलाफ संबंधित केस दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक केस की जांच के दौरान उन्होंने बलदेव सिंह के बयान दर्ज किए हैं जो हल्लोमाजरा में जमीन के मालिक थे। उन्होंने खसरा नंबर 133/2 में 2.5 बिस्वा जमीन जनवरी 1997 में श्याम लाल गुप्ता को बेच दी थी।
वहीं, बलदेव सिंह की पत्नी भूपिंदर कौर के भी बयान दर्ज किए गए हैं, जिसने खसरा नंबर 133/2/1 में 4.5 बिस्वा जमीन की जीपीए अप्रैल 1998 में सोहन लाल को दी थी। उनके साथ ही उनकी बहन करनैल कौर के भी बयान दर्ज किए गए हैं। इन सब के बयान को आधार बनाकर पुलिस ने कहा है कि हल्लौमाजरा में खसरा नंबर 133/2 में कैंथ और उनके परिवार ने शिकायतकर्ता की प्रापर्टी (प्लॉट) में अतिक्रमण किया है।