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भाजपा मंत्री अनिल विज बिफरे, सरकार का बेड़ा गर्क करने में लगे हैं अफसर कह कर फेंका फोन

Fri, 13 Mar 2020 10:13 AM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पाण्डेय, चंडीगढ़
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मंत्री अनिल विज - फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज एक बार फिर से आग बबूला हो गए हैं। बात करते-करते वे एकदम बिफर गए और उन्होंने फोन फेंक दिया। मंत्रियों को जारी होने वाली स्वैच्छिक निधि अभी तक जारी नहीं हुई है। सीएमओ के एक अधिकारी ने इस बाबत विज को फोन कर कहा कि यह फाइल कानूनी राय के लिए एलआर के पास भेजनी पड़ेगी।
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यह सुनते ही विज आग बबूला हो गए और कहा कि आज से पहले कभी यह फाइल एलआर के पास गई है। स्वैच्छिक निधि पर विज ने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री बैठक में कह चुके हैं कि ग्रांट जारी करो। चार माह सरकार बने हो गए हैं। मंत्री फील्ड में लंबे चौड़े वादे करके आ रहे हैं। 31 मार्च तक इसे मंजूरी मिलेगी, उसके बाद हम इसका क्या करेंगे।

इतना कहने के बाद दूसरी तरफ से अधिकारी ने कुछ समझाना चाहा, लेकिन विज ने फोन उठाकर मेज पर फेंक दिया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सीएमओ में बैठे अधिकारी ही सरकार का बेड़ा गर्क करने में लगे हैं।
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ये है मामला

दरअसल, हरियाणा सरकार के मंत्रियों को अब स्वैच्छिक ग्रांट की चिंता सता रही है। सरकार गठन के चार महीने बाद भी अभी तक मंत्रियों की स्वैच्छिक ग्रांट रिलीज नहीं हो सकी है। जबकि सभी कैबिनेट बैठकों में स्वैच्छिक ग्रांट का एजेंडा पहले नंबर पर रहता है।

हालांकि छोटे-मोटे खर्चों के लिए मंत्रियों को करीब 10 लाख रुपये वाली ‘पेटी’ ग्रांट तो मिल चुकी है, लेकिन इस ग्रांट से मंत्रियों का काम नहीं चल रहा है। यह पेटी ग्रांट भी खत्म होने के कगार पर है। क्षेत्र के दौरों में सार्वजनिक कार्यों के लिए हर रोज मंत्रियों के पास प्रार्थना पत्र आ रहे हैं, लेकिन ग्रांट न मिलने के कारण मंत्रियों की ओर से अभी तक हामी नहीं भरी जा रही है।

लिहाजा कुछ मंत्री तो क्षेत्र के निजी उद्घाटन समारोहों में जाने से कन्नी काट रहे हैं। मंत्रियों की स्वैच्छिक ग्रांट का कोटा सात करोड़ रुपये वार्षिक है। इसे मंत्री की ओर से किसी भी निजी संस्था व अन्य कार्यक्रमों में दिया जा सकता है। उधर, सूत्रों का कहना है कि 31 मार्च के बाद नए बजट में मंत्रियों को स्वैच्छिक ग्रांट जारी हो जाएगा। मौजूदा वित्त वर्ष में बजट की दिक्कत के कारण यह काम सिरे नहीं चढ़ सका था।
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