चंडीगढ़। भाजपा चंडीगढ़ ने शामलात भूमि के मुद्दे पर किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। भाजपा ने प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। भाजपा चंडीगढ़ प्रदेश के महामंत्री रामबीर भट्टी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 2026-07-08 को राज्यपाल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को किसानों की चिंताओं से अवगत कराया। उन्होंने प्रशासन के हालिया फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया। चंडीगढ़ प्रशासन ने नगर निगम को शामलात भूमि अपने कब्जे में लेने के निर्देश दिए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों में असमंजस और चिंता का माहौल है।
किसानों के अधिकार और परंपरागत व्यवस्था
भाजपा नेताओं ने बताया कि शामलात भूमि किसानों की साझा भूमि होती है। इसे उनकी निजी कृषि भूमि से हिस्सेदारी के आधार पर छोड़ा गया था। वर्षों से इस भूमि का उपयोग गांवों में पशुओं के चरागाह और अन्य सामुदायिक कार्यों के लिए होता रहा है। इस भूमि से संबंधित किसी भी निर्णय से पहले किसानों के अधिकारों और परंपरागत व्यवस्था को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
पूर्व नीति की समीक्षा की मांग
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अतीत में जब प्रशासन ने शामलात भूमि का अधिग्रहण किया था, तब किसानों को उनकी हिस्सेदारी के अनुसार मुआवजा दिया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासन स्वयं भी किसानों के अधिकारों को स्वीकार करता रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि पूर्व में अपनाई गई नीति को ध्यान में रखते हुए वर्तमान निर्णय की समीक्षा की जाए। किसी भी कार्रवाई से पहले किसानों का पक्ष सुना जाए।
मुलाकात के दौरान प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही डीसी चंडीगढ़ और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई जाएगी। राज्यपाल ने भरोसा दिलाया कि किसानों के हितों, कानूनी पहलुओं और सभी संबंधित पक्षों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत एवं सकारात्मक समाधान निकालने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। भाजपा ने उम्मीद जताई कि प्रशासन किसानों के वैध अधिकारों और भावनाओं का सम्मान करते हुए संतुलित निर्णय लेगा।