भाजपा के साथ तीन बार मिली सत्ता
पंजाब में भाजपा के साथ शिअद तीन बार सत्ता हासिल कर चुकी है। 1997 में 68.14 प्रतिशत हुए मतदान में अकालियों ने भाजपा के साथ सरकार बनाई थी। इसके बाद 2007 में 76 प्रतिशत मतदान हुआ था और अकालियों ने सत्ता हासिल की। 2012 में मतदान प्रतिशत बढ़कर 78.30 के बाद भी अकालियों ने सत्ता पर कब्जा कर लिया था।
अकाली, भाजपा और कैप्टन का नापाक गठजोड़: आप
आप नेता हरपाल सिंह चीमा ने शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी पर पंजाब और पंजाबियों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है। बिक्रम सिंह मजीठिया के अकाली दल का भाजपा के साथ दोबारा गठजोड़ होने वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए चीमा ने कहा कि इस बयान ने शिअद और भाजपा के चेहरे को पंजाबवासियों के आगे बेनकाब कर दिया है। चीमा ने दावा किया कि शिअद, भाजपा और कैप्टन अमरिंदर सिंह के गठजोड़ की साझी सरकार मंगल गृह पर ही बन सकती है, क्योंकि पंजाब के वोटरों ने तीनों पार्टियों ने पूरी तरह नकार दिया है।
चीमा ने कहा कि चुनाव के दिन बिक्रम सिंह मजीठिया के पंजाब में सरकार बनाने के लिए अकाली दल का भाजपा के साथ गठजोड़ होने के दावे ने साबित कर दिया है कि किसानों, मजदूरों और पंजाब की जनता का वोट लेने के लिए अकाली दल भाजपा से अलग हुआ था। हालांकि सच यह है कि अकाली दल और भाजपा एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं।
अकाली दल का भाजपा के साथ अंदर खाते सियासी गठजोड़ आज भी कायम है लेकिन पंजाब के लोगों को धोखा देने के लिए अकाली दल ने भाजपा से अलग होना का ड्रामा किया था। चीमा ने कहा कि शिअद-भाजपा गठबंधन के कारण ही बिक्रम मजीठिया के खिलाफ केंद्र सरकार की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी एजेंसियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि मजीठिया के खिलाफ विभिन्न मामलों में केस दर्ज किए गए थे। भाजपा के समर्थन के कारण ही अकाली नेता अभी माफिया शासन चला रहे हैं। नशा माफिया, रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया और केबल माफिया लोगों को लूट रहे हैं।