गोशालाओं के पास आय के साधन के रूप में केवल गोबर व गोमूत्र है। दूध नाममात्र का होता है। इसलिए इन्हें स्वावलंबी बनाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत गोबर व गोमूत्र से फिनाइल, धूप व अन्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके लिए जरूरी मशीनों पर 90 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दी जा रही है।
केरल को दिया एक लाख लीटर फिनाइल
गोशालाओं की आय बढ़ाने के लिए यहां फिनाइल बड़े पैमाने पर तैयार होने लगा है। ऐसे में गोशालाओं के सामने इसे बेचने की दिक्कत खड़ी हो गई है। इस संबंध में गोसेवा आयोग ने सरकार को पत्र लिखा है। इसमें अस्पताल, वेटरनरी अस्पताल, ट्यूरिज्म में यह फिनाइल इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसे जल्दी ही मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद यही फिनाइल इस्तेमाल करनी होगी। इसी कड़ी में प्रदेश से एक लाख लीटर फिनाइल केरल भेजी गई है।
किसानों की श्रेणी में आ सकती हैं गोशालाएं
गोसेवा आयोग ने गोशालाओं को किसानों की श्रेणी में लाने का प्रपोजल सरकार को भेजा है। इसके तहत किसानों को दिया जाने वाला लाभ गोशाला को भी दिए जाने की बात कही गई है। इससे गोशाला में जरूरी उपकरण व अन्य चीजें रियायती दर पर उपलब्ध हो सकेंगी।
बायो गैस व बायो सीएनजी का पायलेट प्रोजेक्ट गुरुग्राम में शुरू किया जा रहा है। इसके अलावा गोशालाओं को स्वावलंबी बनाने, इन्हें किसानों की श्रेणी में लाने की तैयारी है। इसके लिए प्रपोजल सरकार को भेजे जा चुके हैं। सीएम ने गोशालाओं के बिजली कनेक्शन व्यवसायिक से घरेलू कर बड़ी राहत दी है।
गोहत्या, गोतस्करी रोकने में हम काफी हद तक सफल रहे हैं। मेवात में ऐसा बड़े स्तर पर होता रहा है। अब यह पहले से कम है। इसलिए भी गोवंश सड़कों पर ज्यादा हैं। गोशाला में आने वाली बीमार व घायल गायों के इलाज की भी व्यवस्था की गई है। वीएलडीए इनकी देखभाल के लिए गोशाला जाते हैं। -भानीराम मंगला, चेयरमैन, गोसेवा आयोग