सम्मेलन में क्षेत्रीय और केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईओ) के विभिन्न पुलिस संगठनों के 65 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य एलईओ एजेंसियों और एआईयू-आईएनडी द्वारा वित्तीय आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण बनाना और अपनी साझेदारी को मजबूत करना था।
पंजाब के डीजीपी खुफिया वीके भावरा ने आतंकवाद से लड़ने के लिए राज्य की प्रतिबद्धता व्यक्त की और लोगों से किए गए सभी वादों को पूरा करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के आगमन के साथ, जांच प्रक्रिया अधिक जटिल हो गई है, जिसने राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय को प्रोत्साहित करना बहुत महत्वपूर्ण है।
अहम आतंकी मामलों, आतंकियों की फंडिंग और कुछ अन्य आर्थिक अपराधों को हल करने के लिए टारगेटिड इंटेलिजेंस प्रदान करने में एफआईयू-आईएनडी की भूमिका का उल्लेख करते हुए भावरा ने मनी लांड्रिंग और वित्तीय आतंकवाद के मामलों को रोकने और जांच करने के लिए एनआईए और एफआईयू-आईएनडी के बीच एक मजबूत प्रणाली स्थापित करने पर जोर दिया।
उन्होंने एफआईयू के प्रयासों की सराहना की, जिसने 2009 से आतंकवादी संगठनों का पता लगाने में अहम भूमिका निभाई और एफआईयू-आईएनडी के साथ इसके शानदार तालमेल की भी सराहना की। इस मौके पर एफआईयू-आईएनडी के अधिकारियों ने भी विभिन्न सत्रों के दौरान टेरर फंडिंग आदि के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।