यह है मामला : वजीफे की सात साल की राशि का किया था गबन
मकडौली खुद में वर्ष 2007 में अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग की वजीफा राशि के गबन का मामला सामने आया था। तत्कालीन स्कूल प्रभारी ने वर्ष 1999 से 2007 तक की लाखों रुपये की राशि हड़प ली थी। शिक्षा विभाग की इस अनियमितता की शिकायत एक शिक्षक ने मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से की।
इसे विभाग ने गलत ठहराते हुए रद्द कर दिया। बाद में अभिभावकों ने डीसी से शिकायत की। इस जांच में स्कूल प्रभारी दोषी पाया गया। शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रभारी को चार्जशीट कर दिया। वर्ष 2010 में उसके खिलाफ एफआईआर हुई। इस मामले में विभाग ने कोर्ट में सही जांच रिपोर्ट के बजाय अपने स्तर पर फर्जी रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश कर दी। इस मामला रद्द हो गया।
मूल रिकॉर्ड नष्ट करने का किया गया प्रयास
सेवानिवृत्त शिक्षक राजेंद्र राठी ने प्रदेश के राज्यपाल को शिकायत भेजी थी। इसमें अदालत में गलत जवाब दावा पेश करने के साथ मूल रिकॉर्ड नष्ट करने के बारे में भी कहा गया। यही नहीं कोर्ट में दाखिल दो अलग-अलग रिपोर्ट की जांच की भी मांग की गई। इनके मिलान से सच सामने आना का दावा देखते हुए राज्यपाल ने एडीसी को जांच सौंपी। इस मामले में कार्रवाई को लेकर एसीएस से मुलाकात की है।
छात्रवृत्ति गबन मामले में बनी चार जांच रिपोर्ट
एडीसी की जांच में सामने आया कि डीईईओ कार्यालय ने छात्रवृत्ति गबन मामले में चार जांच रिपोर्ट तैयार की। जिला अदालत में चल रहे केस व उच्च न्यायालय में प्रस्तुत जवाब दावे और जांच रिपोर्ट भिन्न मिली। पहली व चौथी रिपोर्ट फेक है। चौथी रिपोर्ट किस अधिकारी के कहने या किस संदर्भ में तैयार की, विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया।
गबन मामले में वजीफा वितरण रजिस्टर, छाया प्रति व एपीआर के बारे में अधिकारी संबंधित स्कूल व न्यायालय को भ्रमित करता रहा। यही नहीं अदालत में जमा कराई गई चौथी रिपोर्ट पर डायरी नंबर तक दर्ज नहीं मिला। इस रिपोर्ट के फार्वर्डिंग लेटर पर स्पेशल लिखा गया है। इस पर पहले तिथि नौ सितंबर 2011 लिखी गई बाद में उसे काट कर 19 सितंबर कर दिया गया। इस पर किसी अधिकारी की मार्किंग तक नहीं है।
गबन पर डाली जा रही रिश्तेदारी की चादर
शिक्षक ने राज्यपाल को दी अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि स्कूल प्रभारी के गबन को रिश्तेदारी की चादर डालकर छिपाया जा रहा है। तत्कालीन डीईईओ आरोपी स्कूल प्रभारी की रिश्तेदार है। इनके साथ कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। यह सभी गबन के मामले को रफा दफा करने का प्रयास कर रहे हैं।