सरकार उनके संघर्ष को पूरी तरह से भूल चुकी है। अपने शहीदों को भूलने वाली कौम का न तो कोई वर्तमान है और न कोई भविष्य। अधिकतर शहीदों को तो लोग पहचान भी नहीं पाएंगे। नई पीढ़ी उनकी शहादत को जानेगी ही नहीं। इसी कड़ी में 13 अगस्त को जसिया में शहीद भगत सिंह की प्रतिमा स्थापित की गई। गुरुवार को रिठाल में भी शहीद भगत सिंह की प्रतिमा लगाई गई। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के बाद उम्मीदवार पार्टी के बन जाते हैं। हिन्दुस्तानी कोई नहीं बनता।
शहीद भगत सिंह ब्रिगेड 31 अक्तूबर को दिल्ली के द्वारका स्थित साहब सिंह वर्मा स्टेडियम में एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए मुहिम चलाएगी। इस मुहिम में हजारों लोग भगत सिंह के बसंती रंग की पगड़ी वाले स्वरूप में एकत्रित होकर विश्व रिकॉर्ड बनाएंगे।
ब्रिगेड ने सरकार को शहीदों की याद संजोने वाला संग्रहालय बनाने का प्रपोजल दिया है। यदि सरकार इसे नहीं बनवाती है तो ब्रिगेड अपने स्तर से इसे ताजमहल से भी बेहतर बनवाएगी। यहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक के शहीदों से जुड़े संस्मरण रखे जाएंगे। इससे पूर्व शहर में तिरंगा यात्रा निकाली गई। एमडीयू से शुरू हुई यह यात्रा भिवानी स्टैंड पहुंच कर संपन्न हुई। यहां शहीद भगत सिंह की प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर उन्हें याद किया। इस मौके पर ब्रिगेड के जिला प्रभारी संदीप बंटू, राजपाल देशवाल, सुरेंद्र खत्री समेत अनेक लोग मौजूद रहे।