जीरकपुर। विकास को रफ्तार देने वाला अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे इन दिनों राहगीरों और वाहन चालकों के लिए डेथ ट्रैप बना हुआ है। जीरकपुर फ्लाईओवर के नीचे हाईवे के दोनों तरफ खुले ड्रेनेज विभाग की बड़ी लापरवाही की गवाही दे रहे हैं। करीब एक किलोमीटर के दायरे में 30 से अधिक जगहों पर ड्रेनेज के ढक्कन खुले पड़े हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। आलम यह है कि करीब सात फीट गहरे इन गड्ढों के पास से गुजरते वक्त राहगीरों की रूह कांप जाती है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआईए) ने करीब एक सप्ताह पहले ड्रेनेज की सफाई का काम शुरू किया था। इसके लिए भारी-भरकम सीमेंटेड ढक्कन हटाए थे। नियमित सफाई के तुरंत बाद इन्हें ढकना चाहिए था, लेकिन हफ्ता बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। कुछ जगहों पर तो ड्रेनेज बुरी तरह टूटे हैं। इससे किनारे खड़े होने वाले वाहनों के धंसने का खतरा बना रहता है। सबसे डरावना मंजर तब देखने को मिलता है जब हाईवे किनारे रहने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे इन खुले गहरे गड्ढों के पास खेलते हैं। मासूम बच्चे ड्रेनेज में झांकते हैं और उसमें पत्थर फेंकते नजर आते हैं। जरा सी चूक इन बच्चों को सीधे सात फीट नीचे मौत के मुंह में धकेल सकती है। रात के अंधेरे में तो यह समस्या और भी विकराल हो जाती है क्योंकि फुटपाथ समझकर चलने वाले राहगीर अक्सर इन खुले गड्ढों से अनजान होते हैं।
अंधेरे में जान का जोखिम
रात के समय यहां स्ट्रीट लाइट्स की रोशनी कई बार कम होती है। फुटपाथ पर चलते समय पता ही नहीं चलता कि कहां ढक्कन गायब है। अगर कोई अजनबी यहां से गुजरे तो उसका गिरना तय है। प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। -रमनप्रीत सिंह, स्थानीय निवासी
व्यापार पर पड़ रहा असर
सफाई के लिए ढक्कन हटाए गए थे, लेकिन अब यह गंदगी और बदबू का केंद्र बन गए हैं। ग्राहकों को दुकान के सामने वाहन पार्क करने में डर लगता है। हाईवे जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर ऐसी लापरवाही बर्दाश्त से बाहर है। - सुमित कुमार, दुकानदार
बच्चों को लेकर हमेशा डर लगता है
हम गरीब लोग हाईवे के किनारे रहते हैं। हमारे बच्चे यहीं खेलते हैं। ड्रेनेज इतना गहरा है कि अगर बच्चा गिर गया तो उसे निकालना मुश्किल होगा। हमने कई बार काम कर रहे मजदूरों से कहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। -माया, प्रवासी महिला
दोपहिया वाहन चालकों के लिए आफत
भीड़भाड़ के समय जब हम हाईवे के किनारे से बाइक निकालने की कोशिश करते हैं, तो ये खुले गड्ढे सीधे यमराज के द्वार की तरह दिखते हैं। टूटे ड्रेनेज के कारण टायर फिसलने का भी डर बना रहता है। -अजय यादव, राहगीर
मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैं अभी इसकी जानकारी लेता हूं। सुरक्षा की दृष्टि से सफाई के तुरंत बाद ढक्कन बंद हो जाने चाहिए थे। इस देरी के कारणों की जांच की जाएगी और सभी ड्रेनेज को जल्द से जल्द कवर करा दिया जाएगा। - रिषभ गोयल, अधिकारी, एनएचएआई