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होनहार बेटीः पिता के निधन के बाद संभाला उनका बिजनेस और बन गई इंटरप्रेन्योर

Thu, 11 Oct 2018 02:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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बेटी के कंधों पर पिता का कारोबार
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मैंने तो कभी सोचा तक नहीं था कि मैं इंटरप्रेन्योर बनूंगी। एक इंजीनियर बनने का सपना था और उसको पिता ने पूरा करवा दिया। इंजीनियरिंग करने के बाद थोड़ा बहुत पापा के साथ काम जरूर किया। पिता ने कहा कि मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर लो तो गुड़गांव चली गई और वहां नौकरी करने लगी। वक्त ने ऐसी करवट ली कि सब कुछ बदल गया। यह कहना है वूमेन इंटरप्रेन्योर माधुरी गोयल का। माधुरी एके शटरिंग की एमडी हैं और अब अपने पिता की इंडस्ट्री को खुद ही संभाल रही हैं।
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माधुरी ने बताया कि उन्होंने सीजीसी घड़ुआं से वर्ष 2014 में इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग की। उसके बाद छह माह तक अपने पिता के साथ काम किया। उनके स्वर्गीय पिता अश्वनी कुमार ने उनको एकाउंट्स मेंटेन करना सिखाया और वर्करों से बातचीत करने की ट्रेनिंग दी। पिता के साथ काम करने के साथ ही उन्होंने कुछ मल्टी नेशनल कंपनियों में जॉब के लिए आवेदन भी दिए थे और उसी में से एक कंपनी में जॉब मिल गई। उनको गुड़गांव में जॉब मिली और वह वहां चली गईं।

उन्होंने कहा कि उस वक्त पिता से अक्सर बात होती थी और वह हमेशा कहते थे कि कंपनियों में अनुभव लेकर आओ और अपना स्टार्टअप शुरू करो। अभी कुछ समय जॉब करते हुए बीता था कि एक दिन पिता की मौत की खबर मिली। पापा को ब्रेन हेमरेज हो गया था। माधुरी ने बताया कि उस समय मां, छोटी बहन और वह तीन लोग ही परिवार में थे। उनको ही इंडस्ट्री को चलाना था। उसी वजह से उनको जॉब छोड़ना पड़ा और वह चंडीगढ़ आईं और इंडस्ट्री को संभाल लिया। एकदम से इंडस्ट्री का भार पड़ा तो थोड़ी परेशानी हुई पर धीरे धीरे स्थिति सामान्य होने लगी।
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उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए बिजनेस को मैनेज करना कोई ज्यादा कठिन नहीं होता है। उन्होंने इतने समय में यही सीखा है। उन्होंने कहा कि शटरिंग का उपयोग हर जगह होता है। कभी थोड़ी समस्या आती है वह भी तब जबकि पेमेंट फंस जाती है। कंपनी के हरेक विभाग को उन्होंने स्ट्रीमलाइन करना शुरू किया और अब स्थिति एकदम सामान्य है। उनकी इसी उपलब्धि के लिए पंचकूला में आयोजित एक समारोह में उनको हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बेस्ट वूमेन इंटरप्रेन्योर अवार्ड भी प्रदान किया।
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सफलता के मंत्र
1-निडरता और साहस है आवश्यक।
2-किसी भी काम में निष्ठा है जरूरी।
3-छोटे से छोटे कर्मचारी की बात सुने।
4-दृढ़ संकल्प ही पहुंचाएगा मंजिल तक। 
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