दूसरों का दर्द बांटने में जो सुकून मिलता है वह और कहीं नहीं मिल सकता है। यह कहना है बाबी सिंह का। यूं तो पंचकूला के सेक्टर-7 और सेक्टर-11 में शॉप है पर दिल इतना बड़़ा कि किसी का दर्द बर्दाश्त नहीं होता और पहुंच जाते हैं मदद के लिए। फिर चाहे पटना हो या चेन्नई, हर मुसीबत पर वह मौजूद होते हैं।
पंचकूला के रहने वाले बाबी सिंह ने बताया कि समाज सेवा की यह अलख कालेज के दिनों में जगी। घर से पाकेट मनी मिलती तो उससे गरीब बच्चों को किताब और पेन पेंसिल खरीद कर दे देते। कोई भूखा दिखा तो उसे खाना खिला देते। बाबी सिंह ने कहा कि जब कालेज छोड़ा और अपना बिजनेस शुरू किया। बाबी सिंह ने बताया कि वह देश के हालात से अपडेट रहते हैं और न्यूज सुनते रहते हैं।
वह बताते हैं कि नेपाल में भूचाल आया तो उन्होंने अपने दोस्तों से बात की और नेपाल पहुंच गए। नेपाल में लोगों को दवाएं बांटी, काफी घर गिर गए थे तो उनके लिए फंड इकट्ठा करके घर बनवाए। उन्होंने बताया कि नेपाल में रहने वाले कुछ बच्चों को उन्होंने औरच उनके दोस्तों ने एडाप्ट भी किया और अभी भी उनकी पढ़ाई का खर्च उठाते हैं।
इसी तरह चेन्नई में फ्लड आया तो वहां के ग्रामीणों तक पहुंचे और उनकी जरूरत का सामान उपलब्ध करवाया। बाबी सिंह ने बताया कि उनकी अप्रोच रिमोट एरिया में होती है क्योंकि वहां राहत का सामान नहीं उपलब्ध करवाया जा सकता है। पंचकूला के फतेहपुर में आग लगी तो सरकारी मदद बाद में पहुंची और बाबी सिंह पहले।
उन्होंने बताया कि लोगों दहशत में थे और लोगों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था, उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर राशन उपलब्ध करवाया और घर बनवाने में मदद की। वर्ष 2016 के दौरान नांदेड़ (महाराष्ट्र) में उन्होंने मेडिकल कैंप लगवाया जिसमें दो हजार ओपीडी और सौ लोगों के आंख के आपरेशन करवाए। पिछले वर्ष डेंगू के सीजन के दौरान उन्होंने पंचकूला, चंडीगढ़ और नारायणगढ़ में लोगों को इमरजेंसी सेवाएं प्रदान की।