चुनाव में 12 बजकर 40 मिनट तक 36 में से 27 सदस्यों द्वारा वोट डाल दी गई। इसी बीच जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल ने चुनाव अधिकारी दर्शन सिंह बराड़ी पर दूसरे दल को वोट करवाने के आरोप लगाए। उन्होंने लिखित ज्ञापन एसडीएम गुहला व कैथल को सौंपा। ज्ञापन देते हुए उन्होंने कहा कि कुल पांच सदस्य ऐसे हैं, जिन्हें वोट करने का अधिकार नही है लेकिन उनकी वोट चुनाव अधिकारी द्वारा पोल करवा दी गई हैं। जबकि उनके पक्ष में आए 19 सदस्यों में से 7 सदस्यों की वोटें पोल होने से रोकी जा रही हैं।
एसडीएम शशि वसुंधरा व एसडीएम संजय कुमार ने तुरंत वोटिंग रुकवा दी। इसके बाद कमेटी के संविधान को ठीक से पढ़कर फैसला लेने की बात कही। जिसके बाद लगभग 2 बजकर 45 मिनट पर फिर से वोटिंग शुरू करवा दी गई ओर सभी वोट पोल करवा दी गई।
दोनों उम्मीदवार बुलाए पोलिंग बूथ के ऊपर
चुनाव के बाद कुछ देर तक फैसला नही सुनाया गया, जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष पोलिंग बूथ में दोनों ही उम्मीदवार ऊपर बुलाए गए। थोड़ी ही देर बाद उम्मीदवार जसबीर सिंह खालसा नीचे आए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि चुनाव है, एक की जीत तो होनी ही थी और वे दादूवाल को उनकी जीत पर बधाई देते हैं।
एचएसजीपीसी चुनाव जीतने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए दादूवाल ने श्री दमदमा टकसाल गुरुद्वारा साहिब में जत्थेदार के पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई। वहां वे किसी भी अन्य साथी को उनके स्थान पर पद नियुक्त किए जाने का स्वागत करेंगे।
वहीं उन्होंने सरकारी तंत्र को चुनाव संपन्न करवाए जाने पर सरकार व प्रशासन का आभार प्रकट किया और मीडिया सहित उन सभी लोगों का भी आभार प्रकट किया जिन्होंने चुनाव में अहम भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा कि वे सिखी के प्रचार-प्रसार व सिखों के हितों के लिए काम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट में हरियाणा कमेटी का जो केस चल रहा है। उसमें मजबूती से हरियाणा का पक्ष रखेंगे।
वर्ष 2014 में बनीं थी हरियाणा कमेटी
कांग्रेस सरकार में हरियाणा विधानसभा में बने एक्ट के बाद हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी बनी थी। इस कमेटी ने हरियाणा के 53 ऐतिहासिक गुरुद्वारों में से 5 गुरुद्वारों की सेवा संभाल ली थी। इसके बाद शिरोमणि गुरुद्वारा कमेटी सुप्रीम कोर्ट चली गई। तब से यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। पहले अध्यक्ष जगदीश सिंह झींडा बनें थे। उन्होंने पिछले दिनों इस्तीफा देकर बलजीत सिंह दादूवाल को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद ये चुनाव हुए।