सिख फॉर जस्टिस खालिस्तान समर्थित समूह है, जिसका गठन 2007 में हुआ था। इसका नेतृत्व अवतार सिंह पन्नू और गुरपतवंत सिंह पन्नू कर रहे हैं। एसएफजे आंतरिक समूह में 8 से 10 लोग शामिल हैं, लेकिन इसका ऑनलाइन समर्थन करने वालों की संख्या लाखों में है। पन्नू का दावा रहा है कि वह पंजाब को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश बनाना चाहता है। इस समूह ने पिछले पांच साल में ही प्रसिद्धि प्राप्त की है।
पांच साल पहले ही इसने अलग खालिस्तान का निर्माण करने की वकालत शुरू की थी। इस उद्देश्य के लिए संगठन ने एक ऑनलाइन अलगाववादी अभियान, सिख रेफरेंडम 2020 की भी शुरुआत की। केंद्रीय एजेंसी आईबी के समक्ष ऐसे 11 मामले आए थे, जिसमें पाया गया कि एसएफजे पंजाब में स्थानीय आतंकवादियों की विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन और अन्य प्रकार से सहायता प्रदान कर रहा है।
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वधावा सिंह और पन्नू के बीच गहरा रिश्ता
बब्बर खालसा प्रमुख वधावा सिंह का कनाडा और ब्रिटेन में बड़ा नेटवर्क है। उससे साफ तौर पर कहा गया है कि वह अपने नेटवर्क से सिख फॉर जस्टिस की रैलियों में पूरा सहयोग करे। वधावा सिंह बब्बर, लखबीर सिंह, रंजीत सिंह नीटा और परमजीत सिंह पंजवड़ को यह भी कहा गया है कि कश्मीरी आतंकी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के लिए पंजाब में नेटवर्क कायम करे और अपने स्लीपिंग सेल को इनकी मदद के लिए कहे, ताकि किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम दिया जा सके।
बीएसएफ ने भी पिछल साल 21 मई को सीमा के पास इंटरनेशनल सिख स्टूडेंट फेडरेशन के दो आतंकियों को हथियारों के साथ पकड़ा था, जिनके लखबीर सिंह रोडे और हरमीत सिंह पीएचडी से संबंधों का खुलासा हुआ।
पिछले साल अक्तूबर में इंग्लैंड में हुई रेफरेंडम 2020 की रैली से पहले अलगाववादियों के एक मंच पर आने से केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ गई थी और आशंका थी कि पंजाब में कोई बड़ी आतंकी घटना घट सकती है। एसएफजे बरगाड़ी और बहिबल कलां कांड को लेकर पैदा हो रहे माहौल से आतंकवाद के लिए जमीन तैयार कर रहा है।
पिछले दिनों पंजाब में अलकायदा के कश्मीरी आतंकी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद (एजीएच) और खालिस्तान गदर फोर्स आतंकी संगठन का खुलासा पुलिस कर चुकी है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की हत्या की साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है।