रोहतक के करौंथा गांव स्थित आश्रम के बाबा रामपाल की बुधवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पेशी है। इसको देखते हुए चंडीगढ़ और सीमा से सटे इलाकों की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।
बाबा के करीब एक लाख समर्थकों के आने की आशंका के चलते चंडीगढ़ पुलिस ने सोमवार को ही अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया था। बाबा के समर्थकों को ट्राईसिटी में घुसने से रोकने के लिए दो हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
इनका नेतृत्व चंडीगढ़ पुलिस के सभी डीएसपी और एएसपी करेंगे। ध्यान रहे कि सिटी में धारा 144 लगा दी गई है और पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में भी सुरक्षा सख्त कर दी गई।
बाबा की पेशी को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस के आईजी और एसएसपी के साथ हुई बैठक में सुरक्षा के सभी इंतजाम कर लिए गए थे। मंगलवार को जीरकपुर-चंडीगढ़, पंचकूला-चंडीगढ़ की सीमा पर कड़ी सुरक्षा रही। इसके साथ ही हाउसिंग बोर्ड पर भी पुलिसफोर्स तैनात रहा।
फन रिपब्लिक के आगे पंचकूला पर भी चंडीगढ़ पुलिस के वज्र वाहन और अन्य सुरक्षा उपकरणों के साथ पुलिसकर्मी तैनात रहे। चंडीगढ़ पुलिस के एसएसपी ट्रैफिक मनीष चौधरी ने कहा कि रैली ग्राउंड में बुधवार को होने वाली रैली में भी सिक्योरिटी इंतजाम पुख्ता कर लिए गए हैं। सिटी के अन्य इंट्री प्वाइंट पर कड़ा पहरा लगा दिया गया है। हाईकोर्ट पर करीब 500 पुलिसकर्मी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।
क्या है करौंथा विवाद
वर्ष 1999 में करौंथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की गई थी। पहली जून, 1999 से 7 जून, 1999 तक लगातार सप्ताह भर सत्संग हुआ। कुछ वर्ष तक सब सामान्य रहा, लेेकिन फिर करौंथा और साथ लगते गांवों के लोगों खासकर आर्यसमाजियों ने रामपाल के प्रवचनों पर आपत्ति जताना शुरू कर दिया।
इसके बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। 12 जुलाई, 2006 को रामपाल के अनुयायियों और आर्यसमाजियों में खूनी टकराव हो गया। इसमें पानीपत के शाहपुर के संदीप, करौंथा गांव की प्रोमिला और बलियाणा गांव के उदयवीर की मौत हो गई थी। दोनों ओर से जवाबी कार्रवाई में 100 से ज्यादा ग्रामीण और पुलिस कर्मचारी घायल हो गए।
इसके बाद पुलिस ने आश्रम पर कब्जा कर लिया। इस मामले में रामपाल और उनके कई समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।