करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा के पास किसानों के सिर फोड़ने के आदेश देने वाले करनाल के तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा जस्टिस अग्रवाल की जांच रिपोर्ट आने से ही पहले आईएएस में कंफर्म हो गए हैं। बीती 14 दिसंबर को केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन से 2018 बैच के विभिन्न राज्य कैडरों के कुल 39 आईएएस अधिकारियों को 27 अगस्त 2020 से आईएएस की सेवा में कन्फर्म कर दिया गया है। इनमें हरियाणा कैडर के सभी 4 आईएएस सचिन गुप्ता, आयुष सिन्हा, अपराजिता और अखिल पिलानी भी शामिल हैं।
ज्ञात हो कि 28 अगस्त को आयुष सिन्हा का वीडियो वायरल हुआ था। इसको लेकर किसान संगठनों समेत सभी ने विरोध किया था। 25 सितंबर को हरियाणा सरकार द्वारा उपरोक्त घटना की जांच के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एसएन अग्रवाल की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग को आयुष सिन्हा की भूमिका की जांच करना भी शामिल है। शुक्रवार 24 दिसंबर को आयोग सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
एडवोकेट हेमंत ने उठाए सवाल
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि आईएएस (प्रोबेशन) नियमावली, 1954 के नियम 3 ए के अंतर्गत नव-नियुक्त आईएएस अधिकारियों को सेवा में कंफर्म करना हालांकि एक सामान्य कार्यवाही है। क्योंकि आयुष सिन्हा, आईएएस के एसडीएम के तौर पर भूमिका की जांच जांच आयोग जांच आयोग कर रहा है, जिसकी रिपोर्ट आनी लंबित है। इसलिए उससे पूर्व ही आयुष सिन्हा को आईएएस में कंफर्म करने पर प्रश्न चिन्ह उठना स्वाभाविक है। इस बात का संदेह है कि क्या हरियाणा सरकार द्वारा जांच आयोग के गठन के बारे में केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय को सूचित भी किया गया था या नहीं।