चंडीगढ़। लोगों में कमर दर्द की बढ़ती शिकायत के लिए बैठने और सोने का गलत तरीका काफी हद तक जिम्मेदार है इसलिए कामकाजी लोगों को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। ध्यान रखें कि बैठते वक्त घुटने और कुल्हे एक सीध में हों या कूल्हे से थोड़े से ऊंचे हों। कुर्सी पर पीछे होकर बैठना है। कुर्सी में एस शेप लंबर सपोर्ट होना चाहिए। गर्दन और कमर को कुर्सी का सपोर्ट न दें। काम के दौरान आंख की ऊंचाई पर लैपटॉप होना चाहिए। यह बातें पीजीआई पेन क्लीनिक की प्रभारी व एनेस्थीसिया विभाग की प्रो. बबिता घई ने शनिवार को दी।
उन्होंने बताया कि पांच पैर वाली घूमने वाली कुर्सी ऑफिस वर्क के लिए बेहतर मानी जाती है क्योंकि काम के दौरान फाइल उठाने या सहयोगियों से बात करने में शरीर का पॉश्चर गलत हो जाता है जबकि मूविंग कुुर्सी से हम सुविधानुसार मूव करते रहते हैं इसलिए काम के दौरान बैठने की स्थिति पर विशेष ध्यान दें। 45 मिनट काम करने के बाद कम से कम 5 मिनट का ब्रेक जरूर लें। टहलें, हाथ-पैर को स्ट्रेच करें।
विभाग की ही डॉ. दीपिका गोयल और डॉ. वरुण सिंगला ने बताया कि युवाओं में कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि इसका कारण ऑस्टियोपोरोसिस या विटामिन डी की कमी ही नहीं हमारी गलत गतिविधियां भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं। इसलिए सक्रिय रहें, व्यायाम करें, लगातार बैठकर काम न करें, खान-पान में पोषक तत्वों को शामिल करें, फास्ट फूड का सेवन न करें, विटामिन डी के लिए तेज धूप में कम से कम दो घंटे तक रहें।
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विशेष किताब का लोकार्पण आज
प्रो. बबिता घई ने बताया कि वर्ल्ड स्पाइन डे के मौके पर 16 अक्तूबर को हरियाणा के गृह व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज व पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल एक विशेष पुस्तक का विमोचन करेंगे। इस पुस्तक को जन जागरूकता के लिए तैयार किया गया है। इसमें फोटो के माध्यम से 24 घंटे की गतिविधि को सही ढंग से करने का तरीका बताया गया है।