प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। शुक्रवार को यहां भूमि अधिग्रहण बिल पर कांग्रेसियों को एकता का पाठ पढ़ाने पहुंचे कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर व विधायक दल की नेता किरण चौधरी के सामने कार्यकर्ताओं ने जहां हंगामा किया।
वहीं तंवर ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम लिए बगैर उन पर जमकर निशाना साधा। दिल्ली में 19 अप्रैल को होने वाली रैली का न्यौता देने पहुंचे प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस किसी जागीर नहीं है और न ही यह किसी की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है, जो कोई कह दे कि मैं ही सब कुछ हूं। कांग्रेस सोनिया राहुल की पार्टी है।
दिल्ली में होने वाली रैली की तैयारियों पर हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण से बड़ा मुद्दा कांग्रेस नेता का बन गया। बैठक में नेताओं ने भाजपा पर कम और अपनों पर ही निशाना ज्यादा साधा।
तंवर के सामने हुड्डा समर्थकों का हंगामा
भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ कांग्रेसियों को इकट्ठा करने पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर और किरण चौधरी के सामने ही हुड्डा समर्थकों ने जमकर हंगामा किया।
पोस्टर पर से पूर्व सीएम का चेहरा गायब होने पर हुड्डा समर्थकों ने अपना रोष जाहिर किया। मामला उस समय बिगड़ा जब मंच संचालक कृष्ण पंडित ने पूर्व विधायक सुमित सिंह को बोलने के लिए नहीं बुलाया तो सुमिता सिंह ने खड़े होकर विरोध जताया।
मामला इतना बिगड़ गया कि करीब 20 मिनट तक बैठक में एक दूसरे के समर्थन और विरोध में नारेबाजी होती रही। इस पर अशोक तंवर और किरण चौधरी ने कार्यकर्ताओं को हाथ जोड़कर शांत किया।
गुलाबी पगड़ी से कुछ नहीं होता दिल कांग्रेसी हो
तंवर ने कहा कि पगड़ी के रंग से कुछ नहीं होता, गुलाबी पगड़ी होने से क्या होता है, दिल कांग्रेसी होना चाहिए। बैठक के बाद रोष मार्च निकालते हुए कांग्रेसी लघु सचिवालय में डीसी को ज्ञापन सौंपा।
वहीं, मंच संचालक कृष्ण ने कहा कि इस समय हरियाणा में कांग्रेस के दो ही रजिस्टर्ड नेता हैं। किरण चौधरी और डॉ. अशोक तंवर। उनके ऐसा कहते ही बैठक में एक दूसरे गुट के जिंदाबाद के नारे शुरू हो गए।
मामला भड़का तो कांग्रेस के पदाधिकारियों ने ही जैसे-तैसे मामला शांत कराया। हालात यह हो गए कि खुद डॉ. अशोक तंवर को उठकर हाथ जोड़कर सभी सदस्यों को शांत करना पड़ा।
बैठक में मौजूद शाहाबाद के विधायक अनिल धंतौड़ी व करनाल की पूर्व विधायक सुमिता सिंह का एक बार भी मंच से नाम नहीं लिया गया।