सैन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जहां हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ उस जगह पर झील काफी गहरी है। गहराई ज्यादा होने की वजह से डूबे हेलीकॉप्टर की लोकेशन पता नहीं चल पा रही है। पंजाब सरकार का ‘विजया’ बेड़े समेत पांच मोटर बोट की मदद से हेलीकॉप्टर को ढूंढने की कोशिश की जा रही है।
भौगोलिक स्थिति की बात करें तो यह इलाका घने जंगल और पहाड़ियों से घिरा है। सुरक्षा की दृष्टि से यहां रोजाना हवाई गश्त की जाती है। सूत्रों का कहना है कि जब यह हादसा हुआ तब हेलीकॉप्टर झील से चंद मीटर की दूरी पर उड़ान भर रहा था। अचानक चालक दल नियंत्रण खो बैठा और हेलीकॉप्टर झील में समा गया।
झील में उतराता मलबा।
चालक दल की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगी हैं। अब तक हेलीकॉप्टर के कुछ हिस्से को ही बरामद किया जा सका है। बाकी हिस्सा तलहटी पर पड़े होने की संभावना है। शाम छह बजे तक बचाव दल ने दोनों पायलटों के जूते और हेलमेट बरामद किए हैं। सैन्य अधिकारियों का यह भी मानना है कि हेलीकॉप्टर क्रैश होने से पहले ही दोनों पायलट कूद गए होंगे। जम्मू और पंजाब की टीमें रणजीत सागर झील के अलग-अलग स्थानों पर जांच कर रही हैं। जांच करने के बाद दोबारा विजया जहाज (बेड़ा) के माध्यम से तलाश शुरू की गई।
फिलहाल चालक दल के दोनों सदस्यों की तलाश की जा रही है। हेलीकॉप्टर का कुछ मलबा और चालक दल का सामान बरामद हुआ है। बचाव कार्य जारी है। दुघर्टना कैसे हुई इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। - सुरेंदर लांबा, एसएसपी, पठानकोट।