आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को केंद्र और प्रशासन की ओर से मानदेय जारी होता है। इनमें से 3600 प्रशासन जबकि 4500 रुपये केंद्र सरकार की ओर से मिलते हैं लेकिन लंबे समय से मानदेय महीनेवार न मिलने से कार्यकर्ता परेशान हैं। ये वो समय है जब अधिकांश कार्यकर्ता कोरोना जैसी महामारी में सेवा दे रहे हैं।
इसमें हर महीने जब कार्यकर्ता अपने खाते की पासबुक एंट्री करवाते हैं तो उसमें महीनेवार मानदेय का जिक्र नहीं होता, जिससे उन्हें यह पता नहीं चलता कि किस महीने का मानदेय मिल चुका है और किस महीने का लंबित है। बता दें कि शहर के कुल 450 आंगनबाड़ी केंद्रों में 950 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कार्यरत हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए किस वित्तीय वर्ष में कितना किराया दिया गया
- वर्ष 2018-19 1.48 करोड़
- वर्ष 2019-20 1.44 करोड़
- वर्ष 2020-21 28.20 लाख
(नोट: लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़े)
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय के लिए कई महीनों का इंतजार करना पड़ता है। केंद्र और राज्य की राशि अलग-अलग आती है, इससे कर्मचारियों को कभी पता ही नहीं चलता कि किस महीने का मानदेय आया है। कार्यकर्ता कोरोना में बिना रुके कार्य कर रहे हैं, इसके बावजूद इन्हें न्यूनतम भत्ता भी नहीं दिया जा रहा है, जो शर्मनाक है। - कमलजीत सिंह, अध्यक्ष, एक्टू (चंडीगढ़)
प्रशासन की ओर से मानदेय का शेयर समय पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खाते में भेज दिया जाता है। केंद्र की राशि आने में कुछ समय लगता है। इसे लेकर विभाग केंद्र के साथ संपर्क में बना हुआ है। किस महीने की राशि आई है, अगर कार्यकर्ताओं को ये नहीं पता चल पा रहा है तो इसके लिए हम हर बार राशि रिलीज करने के साथ मैसेज भेजने की व्यवस्था को शुरू कर सकते हैं। - नितिका पवार, सचिव, समाज कल्याण विभाग चंडीगढ़