पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव का समय पास आने के साथ ही राजनीति भी अब करवट लेने लगी है। वीरवार को हरसिमरत कौर बादल के केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफे के बाद सूबे की सियासत में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या 2022 में अकाली दल -भाजपा अलग अलग चुनाव मैदान में उतरेंगे।
अकाली दल व भाजपा के तमाम दिग्गज कह रहे हैं कि चुनाव में अभी वक्त है, जल्दबाजी में ऐसे फैसले नहीं लिए जाते। वहीं, अकाली दल के नेता दबी जुबान में कह रहे हैं कि हमें भाजपा पर अपना दबाव तो बनाना ही पड़ेगा, अन्यथा विधानसभा चुनावों में भाजपा आधी सीटों की मांग कर सकती है और डिप्टी सीएम पद का दावा भी ठोक सकती है।
ऐसे में भाजपा को अभी से जमीन पर उतरना होगा ताकि उनको यह समझ में आ जाए कि शिअद भाजपा का पिट्ठू नहीं है।कुछ समय पहले ही भाजपा के दिग्गज नेता मदन मोहन मित्तल ने कहना शुरू कर दिया था कि पार्टी सूबे में अपनी सरकार बनाएगी और अकाली दल से अब 23 सीटों पर बात नहीं होगी बल्कि भाजपा तय करेगी कि अकाली दल को कितनी सीटें दी जाएं।
अकाली दल और भाजपा द्वारा पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाला, जहरीली शराब से मौत की घटना आदि को लेकर आयोजित धरने में दोनों दल एक साथ नहीं दिखे।
अकाली दल से ली गई थी सहमति: कालिया
पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया का कहना है कि भाजपा व अकाली दल की कोर कमेटी की बैठक में तीनों कृषि अध्यादेशों पर गहन विचार किया गया। अध्यादेश पास करने से पहले अकाली दल की पूरी सहमति ली गई थी। शिअद ने फसलों का एमएसपी खत्म न करने की मांग की थी, इस पर केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि एमएसपी खत्म नहीं होगा। अकाली दल की सहमति के बाद ही अध्यादेश पास करवाया गया।
हरसिमरत को मंत्रिमंडल की बैठक में आपत्ति जतानी चाहिए थी: भगत
भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कीमती भगत का कहना है कि अकाली दल ने भाजपा के साथ 10 साल पंजाब में क्या किया, वह किसी से छिपा नहीं है। भाजपा मंत्री ने तो कभी इस्तीफे नहीं दिए। अगर बिल किसान विरोधी थे तो हरसिमरत कौर बादल को मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर आपत्ति करनी चाहिए थी।
बढ़ सकती है वर्करों में दूरी: बराड़
अकाली दल के प्रवक्ता चरणजीत सिंह बराड़ का कहना है कि बीबी हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दिया है और भाजपा को यह सोचना पड़ेगा कि इस्तीफा किसानों के हित में दिया गया है। 2022 के चुनाव अभी दूर हैं और दोनों दलों की कोर कमेटी व समन्वय कमेटी की बैठक होगी, जिसमें कई फैसले होंगे। लेकिन इससे भाजपा -अकाली दल के वर्करों में दूरियां बननी तय है।
गठबंधन तोड़ने में जल्दबाजी नहीं: चीमा
अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि 2022 के चुनाव एक साथ लड़े जाएंगे। किसानों के हित में अकाली दल खड़ा रहेगा। 2022 के चुनावों से पहले पार्टी हाईकमान की बैठक होगी, एनडीए की बैठक में फैसले होंगे लेकिन गठबंधन तोड़ने में कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी।